DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक (05 अप्रैल, 2010)

फिर एक प्रेमी युगल ने हताश होकर जान दे दी। जिस खूबसूरत जिंदगी का कभी उन्होंने सपना देखा था, उसका असमय करुण अंत हो गया।

हमारा समाज नई पीढ़ी के सम्मुख अजब विरोधाभासी नजारा पेश करता है। इसकी चकाचौंध में प्रेम के लट्ट जलते-बुझते नजर आते हैं, लेकिन इससे निकलने वाली राहें मानो किसी बंद गली में खत्म हो जाती हैं।

कभी जाति-धर्म, कभी हैसियत, तो कभी कोई और बंदिश जीवन साथी चुनने के कुदरती अधिकार को जब्त कर लेती है। ये घटनाएं बताती हैं कि राजनीतिक दायरे में लोकतंत्र का सूरज भले ही उग चुका हो, समाज व परिवारों पर छाया सामंती घटाटोप अभी हटा नहीं है। इस अंधेरे को चुनौती मरकर नहीं, जी कर ही दी जा सकती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक (05 अप्रैल, 2010)