DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

टीम में भरोसा..

उसे अपने कॉलेज की क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया था। आखिर वह टीम का सबसे अच्छा खिलाड़ी था। टीम भी उसे अच्छी ही मिली थी। एक मैच में उसने कमाल की बैटिंग की। दूसरे में बॉलिंग से मैच जिता दिया, लेकिन जैसे ही उसकी फॉर्म गड़बड़ाई टीम बाकी के मैच हार गई।

बर्लिन सीटी के साइकोलॉजिस्ट डॉ. एनिस्टन का मानना है कि कभी-कभी हम अपने को ज्यादा ही आंकने लगते हैं। हो सकता है कि हम बाकी ग्रुप से बेहतर भी हों। लेकिन लीडर तो वही होता है, जो बाकी टीम पर खुद को थोपता नहीं है यानी जब तक टीम पर भरोसा नहीं करेगा लीडर तब तक एक-दो मैच ही जीते जा सकते हैं, लेकिन लगातार बेहतर प्रदर्शन मुमकिन नहीं है।

वह सचमुच बेहतरीन खिलाड़ी था। उस टीम में उसके आसपास भी कोई नहीं था। इसीलिए उसने सोचा था कि हर मैच उसे अकेले ही जीतना है। लेकिन वह भूल गया था कि कोई कितना ही बड़ा खिलाड़ी हो। अकेले ही सारे मैच नहीं जीते जा सकते। एक खिलाड़ी पर टिकी टीम नहीं जीततीं। टीमें तो वही जीतती हैं, जो अपने हर खिलाड़ी पर भरोसा करती हैं।

अगले सीजन में फिर वही कप्तान था, लेकिन इस बार उनकी टीम आराम से चैंपियन हो गई थी। मजेदार बात यह थी कि कप्तान साहब को कुछ खास करना ही नहीं पड़ा था। उसने न तो बैटिंग में खुद को बहुत आगे किया था। और बॉलिंग भी खास नहीं की थी। बस जरूरत पड़ने पर ही वह खुद को आगे करता था। अपनी पूरी टीम पर उसे भरोसा था और टीम ने उस भरोसे को पूरा किया था। डॉ. एनिस्टन का कहना है कि लीडर जब टीम के पीछे खड़ा होता है, तो वह सचमुच आगे होता है। लीडर जब जबर्दस्ती आगे ही आगे रहता है, तो टीम पीछे रह जाती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:टीम में भरोसा..