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इराकी जनता का फैसला

इराकियों ने अपना फैसला दे दिया है। यह अलग बात है कि आयद अलावी के गठबंधन को नूरी अल मलीकी से दो ही सीट ज्यादा मिली हैं। वहां की जनता ने जो भी फैसला किया है, उसकी इज्जत की जानी चाहिए। यह तो अभी चुनावों का फैसला आया है। यह एक पड़ाव जरूर है। लेकिन इराक को अपनी मंजिल तय करने के लिए लंबा सफर तय करना है। अलावी को बहुमत देकर जनता ने बता दिया है कि वह सेकुलर इराक चाहती है। मजहबी पचड़ों ने उनका बहुत नुकसान किया है। एक देश बनाने के लिए सबको साथ लेकर चलना जरूरी होता है। महज सेकुलर होने से आधा रास्ता तय हो जाता है। अलावी को बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। इस छोटे से बहुमत को बहुत समझ कर देश को जोड़ने की ओर बढ़ना होगा। इराक तबाही से उठ कर जिंदगी को महसूस कर रहा है। उन्हें खुशहाली की तरफ ले जाने की कोशिश अलावी को करनी होगी।
खलीज टाइम्स, दुबई

लेकिन कितना नुकसान हुआ
देश में कितनी औरतें बुरका ओढ़ती हैं, यह तो फ्रांसीसी लोगों को पता है। उन्हें यह भी मालूम है कि स्विट्जरलैंड में कितनी मीनारें हैं। लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनकी सरकार की एक तकनीकी गड़बड़ी से देश को कितना नुकसान हुआ है। जब मंदी का दौर चल रहा था, तब सरकार ने 18 बैंकों को उबारा था। बैंक जो चाहते थे, उस तरह का ‘बेल आउट’ मंजूर किया था। लेकिन उन बैंकों के शेयर खरीदने की कोशिश उन्होंने नहीं की। अगर वह कर लिया होता, तो आज उन्हें बेच कर सरकारी खजाने में अच्छी खासी रकम जुड़ गई होती। हमारी सरकार के एक गलत फैसले से 20 बिलियन यूरो का नुकसान हो गया है। क्या सरकार इसका जवाब देगी?
ला मॉन्ड डिप्लोमेटिक, पेरिस

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