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ब्लैक होल

ब्रह्मांड के संदर्भ में अकसर आप ब्लैक होल के बारे में सुनते रहेंगे। हमारे अंतरिक्ष में जब किसी बड़े तारे का पूरा का पूरा ईंधन जल जाता है तो उसमें एक जबरदस्त विस्फोट होता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में सुपरनोवा कहते हैं। इस तरह का विस्फोट होने के बाद जो पदार्थ बाकी बचता है वह धीरे-धीरे सिमटना शुरू हो जाता है और एक बहुत ही घने पिंड का आकार ग्रहण कर लेता है जिसे न्यूट्रॉन स्टार कहते हैं। अगर न्यूट्रॉन स्टार बहुत विशाल है तो गुरुत्वाकर्षण का दबाव इतना होगा कि वह अपने ही बोझ से सिमटता चला जाएगा और इतना घना हो जाएगा कि वहां एक ब्लैक होल बन जाएगा।

क्या है प्रमाण
अकसर यह सवाल भी उठाया जाता है कि हम कैसे कह सकते हैं कि यह ब्लैक होल है? इसके कुछ प्रमाण भी हैं। एक तो जब भी कोई पिंड या पदार्थ ब्लैक होल के नजदीक पहुंचता है तो वह उसकी तरफ खिंचता चला जाता है।

इस प्रक्रिया में वह लाखों डिग्री के तापमान पर जलता-झुलसता है और फिर गायब हो जाता है। यही इस बात का साफ प्रमाण है कि वह ब्लैक होल में समा गया। इसके अलावा एक और प्रमाण ये है कि जहां ब्लैक होल होता है उसके गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के आसपास मौजूद तारे उसका चक्कर लगाते रहते हैं।

इनकी गति को देखकर खगोलविद ब्लैक होल की स्थिति और उसके आकार का अनुमान लगा सकते हैं। ब्लैकहोल इतने सघन और असीम ऊर्जा वाले होते हैं जिनसे प्रकाश भी नहीं बच सकता। जो भी भौतिक वस्तु इसके निकट पहुंचती है वह इसमें समा जाती है।

अन्य शब्दों में कहें तो ब्लैक होल गुरुत्वाकर्षण का एक बहुत बिगड़ा हुआ रूप होता है। ऐसा रूप जिसमें गुरुत्वाकर्षण अपने निकट आने वाली सभी भौतिक वस्तुओं को निगल जाता है।

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  • Web Title:ब्लैक होल