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नई शुरुआत

जब भी कोई नई शुरुआत होती है, तो बदलाव होता है। जीवन तमाम ऐसी नई-नई घटनाओं और स्थितियों से भरा है, जो हमें उन बदलावों के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में खुद को बदलावों के साथ प्रभावी रूप से बदलने की कला का जानकार होना जरूरी होता है।

निजी अथवा संगठन के स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण है, बदलती स्थितियों में खुद को उपयोगी बनाए रखने के लिए अपनी या समूह की क्षमताओं को जानना। किसी भी बदलाव या संस्था द्वारा उठाए जा रहे कदम की पूरी ऊर्जा उसके नएपन में छुपी हुई है।

लेकिन कई बार बदलावों की शुरुआत ही अंत से होती है। जिसमें प्रमुख भूमिका निभाता है लोगों का उसके प्रति व्यवहार और प्रयास। ऑफिस के स्तर पर देखें तो प्रबंधक बदलाव की विषय वस्तु और उसके तकनीकी पहलू के प्रति इतने विश्वस्त होते हैं कि वे अपने ही लोगों पर उसके मनौवैज्ञानिक प्रभावों को भूल जाते हैं। परिणामस्वरूप गलत विश्लेषण के चलते यह मान लिया जाता है कि लोग बदलाव नहीं चाहते या वे समर्पित नहीं हैं, जो ठीक नहीं है। पुराने को अलविदा और नए की शुरुआत करने की दिशा में कुछ जरूरी बातें:

हालात पर काबू: क्या आपके लोग या फिर खुद आप यह मानते हैं कि जो हो रहा है, उसे नियंत्रित करने की क्षमता भी आप रखते हैं?

सूचना और जानकारी: क्या लोग वास्तव में जानते हैं कि क्या हो रहा है और क्यों? यदि आप क्यों का जवाब नहीं जानते तो क्या भी अपना अर्थ खो देता है।

संगठनात्मक और प्रबंधकीय आधार: बदलाव के लिए व्यावहारिक स्तर (जैसे प्रशिक्षण, शिक्षा, सॉफ्टवेयर और उपकरण) तथा भावनात्मक स्तर  जैसे  समय, स्थितियों आदि के बारे में विचार विमर्श के संबंध में किस तरह की मदद उपलब्ध कराई जा रही है?

प्रमुख उद्देश्य: यह पता लगाने की कोशिश करना कि बदलावों में आपके लिए क्या है? जीवन बदलावों से भरा है। ऐसे में किसी भी बदलाव से पूर्व आपके लिए इन चारों बिंदुओं पर विचार करें जिससे आप सभी बदलावों के दौरान प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकेंगे।

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