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मनमोहन अमेरिका में परमाणु सम्मेलन में हिस्सा लेंगे

मनमोहन अमेरिका में परमाणु सम्मेलन में हिस्सा लेंगे

परमाणु हथियारों के आतंकवादियों के हाथों में जाने को लेकर बढती चिंताओं के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 12 अप्रेल को अमेरिका में 42 देशों के नेताओं के साथ इस तरह की स्थिति रोकने के लिए वैश्विक पहल को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
   
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहल पर दो दिवसीय इस परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में चोरी-छिपे परमाणु प्रसार और परमाणु सामग्रियों की अवैध तस्करी के खतरों और आतंकवादियों द्वारा परमाणु समाग्रियों को हासिल किये जाने की संभावनाओं पर मुख्य रूप से जोर रहेगा।
    
सम्मेलन में मनमोहन सिंह द्वारा आतंकवदियों के व्यापक संहार के हथियारों को हासिल किये जाने के बारे में भारत की चिंताओं को रेखांकित किये जाने की संभावना है। पाकिस्तान में यह खतरा ज्यादा है जहां माना जाता है कि परमाणु सामग्री बहुत ज्यादा सुरक्षित नहीं है।

उम्मीद है कि सिंह भौतिक सुरक्षा और कानूनी उपायों के जरिये परमाणु सामग्रियों को सुरक्षित करने पर व्यापक प्रोत्साहन की आवश्यकता को रेखंकित करेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा भारत में एक अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा केन्द्र स्थापित किये जाने का प्रस्ताव करने की भी संभावना है।
   
विदेश सचिव निरूपमा राव ने इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सिंह की अमेरिका यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आतंकवाद ओर आतंकवादी गुटों द्वारा परमाणु उपकरणों एवं सामग्रियों को हासिल किये जाने की संभावनाओं को लेकर हमारी चिंताओं से आप अवगत हैं। राव ने कहा कि भारत इस सम्मेलन और इससे जुड़ी तैयारी प्रक्रियाओं को परमाणु सुरक्षा पर सहयोग करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय संकल्प को मजबूत बनाने में एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में देख रहा है।

उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद पर हमारी चिंताओं और साथ ही असैनिक परमाणु ऊर्जा के विस्तार में हमारे हितों को देखते हुए यह भारत के हित में होगा। व्यापक विनाश के हथियार आतंकवादियों के हाथों में न जाने पाये इसके लिए वर्ष 2002 से भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखता रहा है।

सम्मेलन के अंत में दस्तावेज जारी किया जायेगा जो देशों की अपने परमाणु सामग्रियों और हथियारों को सुरक्षित रखने की राष्ट्रीय जिम्मेदारी को रेखांकित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की उम्मीद है कि दस्तावेज तात्विक होगा और साथ ही उसने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु सामग्री सुरक्षित रहे यह सुनिश्चित करना सभी जिम्मेदार देशों का दायित्व है। ईरान, उत्तर कोरिया, क्यूबा और वेनेजुएला जैसे देशों को वाशिंगटन में आयोजित इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया है।

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