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सड़कों पर भिखारियों का चल रहा ट्रैफिक सिग्नल

दिल्ली सरकार राष्ट्रमंडल खेलों से पहले जहां दिल्ली की सड़कों से भिखारियों को हटाने की कोशिश में लगी हैं, वहीं यहां के भिखारी मधुर भंडारकर की फिल्म ट्राफिक सिगनल की माफिक अपना सिंडिकेट चला रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में अधिकारियों को कथित तौर पर ऐसे संगठित सिंडिकेट का पता चला है जो भिखारियों का नेटवर्क चलाते हैं।

भिखारियों को अनदेखा करने के लिए पुलिस और सरकार को कथित तौर पर हफ्ता पहुंचाया जाता हैं। सिंडिकेट के माफिया ट्रैफिक लाइट, गोलचक्कर और बाजारों के लिए भिखारियों को लाइसेंस जारी करते हैं। किसी बाहरी को अगर वहां काम करना हो तो उसे रोजाना या हफ्ता पहुंचाना पड़ता हैं।

नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, हर रेड लाइट, गोल चक्कर और बाजार भिखाडि़यों के किसी दल या परिवार के नियंत्रण में होता हैं। बाहर का कोई भी वहां आकर बिना ठेकेदार को नजराना दिए भीख नही मांग सकता।

राष्ट्रमंडल खेलों के करीब होने के कारण राज्य सरकार सड़कों को भिखाडि़यों से खाली कराने के पुरजोर प्रयास कर रही हैं।

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