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आधा हो जाएगा इसरो के अंतरिक्ष अभियानों का खर्च

आधा हो जाएगा इसरो के अंतरिक्ष अभियानों का खर्च

अधिक वजन लेकर उडान भरने में सक्षम राकेट के विकास के साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष अभियानों का खर्च घटकर लगभग आधा हो जाएगा।
 
इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने शनिवार शाम यहां भारतीय विज्ञान संस्थान में एक व्याख्यान देते हुए को कहा कि करीब दो दशक पहले भारत को क्रायोजेनिक इंजन तकनीक दिए जाने से इनकार करने के बाद इसरो ने अपने बलबूते से यह तकनीक विकसित कर ली है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से अंतरिक्ष अभियानों में होने वाले खर्च में भारी कमी आएगी।
 
अंतरिक्ष अभियान विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी सामान अंतरिक्ष तक ले जाने में इस समय प्रति किलोग्राम तकरीबन 20 हजार डालर का खर्च आता है। लेकिन क्रायोजेनिक तकनीक हासिल करने के बाद भारत इस खर्च को आधा कर सकता है।
 
राधाकृष्णन ने बताया कि इसरो द्वारा विकसित तकनीक प्रक्षेपण यान जीएसएलवीएमके तृतीय की मदद से इस खर्च को कम से कम आधा किया जा सकेगा। इस यान की मदद से चार टन वजन की श्रेणी के उपग्रह का प्रक्षेपण किया जा सकेगा। यह भार क्षमता पहले बेहद सफल रहे प्रक्षेपण यान पीएसएलवी से लगभग दोगुनी है। इस नई तकनीक का अगले तीन वर्षों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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