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रेलवे की सस्ता पानी और खाना देने की योजना

रेलवे की सस्ता पानी और खाना देने की योजना

रेल यात्रियों को दस रूपए की पूरी भाजी के साथ साथ अब बोतल बन्द पानी भी 12 की बजाय 6-7 रूपए में मिल सकेगा। रेल मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मंत्रालय जल्द ही घोषित की जाने वाली नई रेल खान पान नीति के तहत बोतल बन्द पानी को महज 6 से 7 रूपए में बेचे जाने का प्रस्ताव है।

सूत्रों के अनुसार रेलवे मंत्रालय ने चुनिंदा स्टेशनों पर 10 रूपए में जनता आहार बेचे जाने की व्यवस्था की है जिसे जल्द ही अन्य स्टेशनों में शुरू किया जाएगा,  लेकिन रेल यात्रियों को 10 रूपए में जनता भोजन के साथ बोतल बन्द पानी 12 रूपए में मिलता है जो निश्चय ही बड़ी अटपटी बात है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय खाने के साथ सस्ता बोतल बन्द पानी भी देगा।

गौरतलब है कि गत फरवरी में पेश हुए रेल बजट में रेलमंत्री ममता बनर्जी ने रेल यात्रियों को सस्ता, ताजा और स्वस्थ पेयजल उपलब्ध कराने की दृष्टि से अमेठी, अंबाला, नासिक, फरक्का, तिरूवनंतपुरम और माल में 6 बाटलिंग प्लांट लगाने की घोषणा की थी।

इस दिशा में काम शुरू हो गया है और रेल यात्रियों को जल्दी ही सस्ते खाने के साथ सस्ता पानी मिलेगा।
 सूत्रों के अनुसार खान पान नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है और बहुत जल्द ही इसकी घोषणा होने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार रेल यात्रियों की यात्रा सुरक्षित और आरामदेह बनाने की दृष्टि से मंत्रालय ने रेलों में साफ सुथरे बिस्तरें उपलब्ध कराने की दृष्टि से महत्वाकांक्षी योजना बनाई है जो खानपान नीति का ही अंग है। इसके तहत मंत्रालय निजी और सरकारी (पीपीपी) भागीदारी के साथ मिलकर एक बिस्तर धोने का संयंत्र लगाने का निर्णय लिया है।

ममता बनर्जी के अनुसार खान-पान के बारे में उनके मंत्रालय को अनेक शिकायतें मिली हैं इसलिए चुनिंदा गाड़ियों में भारतीय रेलवे खान-पान एवं पर्यटन विभाग की बजाय मंत्रालय द्वारा विभागीय तौर पर खान-पान सेवा शुरू की गई है।

मंत्रालय का प्रयास है कि रेल यात्रियों को स्टेशन पर स्वच्छ व सस्ता खाना और पानी उपलब्ध कराया जाए इसलिए मंत्रालय अब खान पान सेवाएं अपने हाथ में लेने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि रेल मंत्रालय ने 2004 में नई खान पान नीति घोषित की थी। जिसके तहत खान की जिम्मेदारी के लिए भारतीय रेलवे ओर पर्यटन निगम की स्थापना की गई लेकिन इस विभाग के बारे में खान-पान के छोटे वेंडरों का कहना था कि स्थानीय लोगों के रेलवे स्टेशनों पर समान बेचने से रोजगार अवसर कम हुए हैं और ठेके देने की नीति कुछ बड़े व्यापारिक समूह के हाथों में सिमट गई है।

उससे पहले 1999-2000 में खान-पान नीति बनी थी। सूत्रों के अनुसार रेल यात्रियों द्वारा अक्सर रेलवे स्टेशनों तथा रेलों में मिलने वाली खाने को लेकर शिकायत को मंत्रालय ने गंभीरता से लिया, इसलिए खान-पान नीति में संशोधन किया गया। खान-पान नीति सस्ते खाने के साथ विभिन्न रेल मंडलों में क्षेत्रीय पसंद वाला खाना भी परोसे जाने का प्रयास है।

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  • Web Title:रेलवे की सस्ता पानी और खाना देने की योजना