DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गाँव में डॉक्टरी नहीं की तो 15 लाख देने होंगे

11 अप्रैल से शुरू होने जा रही यूपीपीजीएमई (उत्तर प्रदेश परास्नातक मेडिकल प्रवेश परीक्षा) में इस बार चयनित अभ्यर्थियों को नया बॉण्ड (शपथ) भरने के बाद ही प्रवेश मिल सकेगा। इस बॉण्ड के जरिए वे डिग्री मिलने के बाद तीन वर्ष तक ग्रामीण इलाकों में नौकरी करने के लिए बाध्य हो जाएँगे। ऐसा न किया तो निजी कॉलेजों के समकक्ष फीस का भुगतान करना होगा जो कि करीब तीन वर्ष में 15 लाख रुपए होगी। अभ्यर्थियों से जो बॉण्ड भराए जाने हैं वे शनिवार को चिकित्सा विश्वविद्यालय पहुँच चुके हैं।

राज्य सरकार ने कुछ माह पहले यह फैसला लिया था कि यूपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों या फिर चिविवि से एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) या एमडी (मास्टर ऑफ मेडिसिन) करने वाले अभ्यर्थियों को तीन वर्ष तक अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरी करनी होगी। तब सरकार ने इसके लिए बॉण्ड भरवाने का निर्णय लिया था। इसमें कड़ी शर्ते रखी गई हैं। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि यदि डिग्री मिलने के बाद संबंधित डॉक्टर तीन वर्ष तक ग्रामीण इलाकों में शासकीय सेवा नहीं करता है तो निजी मेडिकल कॉलेजों के बराबर उसे फीस सरकार को देनी होगी। सरकारी कॉलेजों में परास्नातक की फीस करीब 34 हजार रुपए प्रतिवर्ष है। ऊपर से इन जूनियर डॉक्टरों को 25 से 35 हजार रुपए के बीच प्रतिमाह मानदेय भी मिलता है जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रतिवर्ष पाँच लाख रुपए फीस देनी होती है और मानदेय मुश्किल से पाँच से आठ हजार रुपए के बीच मिलता है। इस लिहाज से गाँव में नौकरी न करने पर 15 लाख रुपए सरकार को अदा करने होंगे। यदि संबंधित डॉक्टर बॉण्ड में भरी गई शर्तों को पूरा नहीं करता है और शुल्क भी अदा नहीं करता तो उससे वसूली भूराजस्व देयों की भाँति की जा सकेगी। इसके खिलाफ डॉक्टर को वाद दायर करने की भी अनुमति नहीं होगी। चिविवि के अधिकारियों का कहना है कि पीजीएमई की प्रवेश प्रक्रिया 11 से 15 अप्रैल तक चलेगी। चयनित अभ्यर्थियों से अनिवार्य रूप से यह बाण्ड भरवाया जाएगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गाँव में डॉक्टरी नहीं की तो 15 लाख देने होंगे