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चिविवि में अनुवांशिक बीमारियों पर शोध होगा

चिकित्सा विश्वविद्यालय का एनॉटमी विभाग जल्दी ही अनुवांशिक बीमारियों का इलाज और शोध शुरू करेगा। इसके लिए साइटोजेनेटिक्स लैब खोली जाएगी। चिकित्सा विज्ञान के छात्रों को इलाज के नए तौर-तरीके सिखाने के लिए एमआरआई गैलरी भी खोली जाएगी।

विभाग के 99वें वार्षिक दिवस समारोह में विभागाध्यक्ष डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि साइटोजेनेटिक्स लैब जल्द ही बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस लैब में अनुवांशिक बीमारियों पर शोध होगा। इसके जरिए देखा जाएगा कि कैसे बच्चों में होने वाली अनुवांशिक बीमारियों को रोका जा सकता है। लैब में ऐसी जाँच की भी सुविधा होगी, जिसमें समय रहते बीमारी के बारे में जानकारी मिल सकेगी। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि विभाग में एमआरआई गैलरी भी खोला जाना प्रस्तावित है। इसमें एमबीबीएस छात्रों को अंगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। विभाग में इनबाम्बिंग कक्ष भी खोले जाने की तैयारी है। इस कक्ष में शवों को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।

विभागाध्यक्ष ने बताया कि एमबीबीएस छात्रों की शिक्षा के लिए देहदान की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने बताया कि अब तक 358 लोगों ने देहदान करने का फार्म भरा है। कार्यक्रम में कुलपति डॉ. सरोज चूड़ामणि गोपाल ने कहा कि एनॉटमी विभाग की बेहतरी के लिए प्रशासन हर संभव मदद देगा। इस मौके पर विभाग ने छात्रों, डॉक्टरों व कर्मचारियों को सम्मानित भी किया। वार्षिक वाद-विवाद प्रतियोगिता में बृजेश कुमार शुक्ल, शालिनी उपाध्याय, सन्नी आर सिंह व शेफाली को पुरस्कृत किया गया। अन्य पुरस्कार पाने वालों में सौम्या सिंह, निहारिका अग्रवाल, सागर जौली, वंदना, गौरव कुमार गुप्ता, अशोक कुमार गुप्ता, दिव्या खट्टर, प्रतीक रस्तोगी आदि शमिल हैं।

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