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आफत न बन जाए ऑनलाइन आवेदन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने स्नातक एवं परास्नातक प्रवेश परीक्षा के लिए ऑन लाइन आवेदन पत्र लेने का निर्णय लिया है। तकनीकी युग में विश्वविद्यालय का यह कदम सही है पर दिक्कत यह है कि विश्वविद्यालय ने आवेदन की पुरानी व्यवस्था (ओएमआर शीट पर मैनुअल) को समाप्त कर दिया है। अब सिर्फ ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएँगे। जानकारों का मानना है कि इससे काफी दिक्कतें आएँगी। खास तौर से यूपी बोर्ड के उन छात्रों को जो कम्प्यूटर और इंटरनेट का प्रयोग बिल्कुल नहीं जानते। उन्हें आवेदन के लिए साइबर कैफे संचालकों पर निर्भर होना होगा।

स्नातक प्रवेश परीक्षा (यूजीएटी), परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) तथा विधि प्रवेश परीक्षा (लैट) के कोआर्डिनेटरों, डीन तथा सभी विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक में इस पर काफी देर तक मंथन हुआ था। बैठक में मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि व्यवस्था पहली बार लागू की जा रही है इसलिए इस बार दोनों विकल्प (ऑन लाइन और मैनुअल) रखे जाएँ। जिन छात्रों को ऑन लाइन आवेदन में दिक्कत होगी, वे पुरानी व्यवस्था के तहत आवेदन कर सकेंगे। सिर्फ ऑन लाइन का समर्थन करने वालों का तर्क था कि बीएचयू, हैदराबाद विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुश्किल विश्वविद्यालय आदि ने ऑन लाइन आवेदन कर दिया है, वहाँ भी छात्र आवेदन करते ही हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। पूर्वाचल के आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, देवरिया और जौनपुर के छात्र बड़ी संख्या में इविवि में दाखिला लेते हैं। इंटर पास ये छात्र कम्प्यूटर के बारे में बहुत नहीं जानते क्योंकि यूपी बोर्ड से संबद्ध बहुत कम इंटरमीडिएट कॉलेजों में ही कम्प्यूटर की शिक्षा दी जाती है। इन छात्रों के सामने ऑन लाइन आवेदन करना बड़ी समस्या होगी।

एसएससी में थी दोनों व्यवस्था
जनवरी महीने में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने पहली बार ऑन लाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की। अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एसएससी ने ऑन लाइन के साथ ही मैनुअल आवेदन की पुरानी व्यवस्था को भी बहाल रखा। वर्तमान में यूजीसी नेट के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। इसमें भी पहली बार ऑन लाइन आवेदन लिया जा रहा है पर हार्ड कॉपी भी जमा करवाई जा रही है। इसके पीछे उद्देश्य अभ्यर्थियों को मुश्किल से बचाना है। ठीक इसी तरह से इविवि की संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट), जिसमें पहली बार ऑन लाइन आवेदन का सफल प्रयोग हुआ, में भी ऑन लाइन आवेदन के साथ हार्ड कॉपी जमा करवाई गई थी।

ऑन लाइन के फायदे
-आवेदन पत्र लेने के लिए बैंक में भीड़ नहीं लगानी होगी।
-जमा करने के लिए प्रवेश भवन में लंबी कतार भी नहीं लगेगी।
-आवेदन पत्रों की ब्लैक मार्केटिंग से बचाव होगा।
-प्रवेश पत्र भी ऑन लाइन ही मिल जाएगा।

ऑन लाइन के नुकसान
-कम्प्यूटर, नेट का प्रयोग न जानने वाले छात्र परेशान होंगे।
-फोटो तथा डाक्यूमेंट्स को स्कैन कराने में होगी दिक्कत।
-बैंक में फीस जमा करने के लिए लगानी ही होगी कतार।
-साइबर कैफे संचालकों की मनमानी बढ़ जाएगी।

‘‘2005 में जब मैंने आवेदन के लिए ओएमआर शीट की व्यवस्था लागू की थी तो भी इसी तरह से सवाल उठे थे। यह फैसला पूरी तरह से छात्रों के हित में है। उन्हें इसके कई फायदे होंगे। आगे देखेंगे अगर दिक्कत आई तो पुरानी व्यवस्था को भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है।’’
-प्रो. एचएस उपाध्याय, कोआर्डिनेटर, यूजीएटी

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