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उच्च न्यायालय में बस कंडक्टर की याचिका खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो यात्रियों से किराए के रूप में वसूले गए 24 रुपये अपने पास रखने के लिए नौकरी से बर्खास्त किए गए दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के एक कंडक्टर की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।

न्यायाधीश कैलाश गंभीर ने कहा, ''छोटे पैमाने पर भी भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति के साथ कोई उदारता या सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती, भ्रष्टाचार पर सभी उपायों से आरंभिक अवस्था में ही रोक लगनी चाहिए।''

न्यायालय ने पिछले सप्ताह के अपने एक आदेश में कहा कि ड्य़ूटी पर तैनात कंडक्टर मामूली भ्रष्टाचार ही कर सकता है और उससे हजारों या लाखों रुपये के गबन की उम्मीद नहीं की जा सकती। उसका काम टिकट देना है और ऐसा न करके वह रोजाना केवल कुछ ही रकम अपनी जेब में डाल सकता है।

न्यायालय ने कहा कि लेकिन ऐसा रोजना करके वह अपने मासिक वेतन से भी अधिक पैसा कमा सकता है। इस याचिका को डीटीसी के कर्मचारी की विधवा शांति देवी ने दायर किया था। उसके पति को वर्ष 2000 में बर्खास्त किया गया था और वर्ष 2005 में उसकी मौत हो गई। शांति देवी ने बर्खास्तगी के फैसले को श्रम न्यायालय द्वारा जायज ठहराए जाने को चुनौती दी थी।

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