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बड़े नाज़ुक होते हैं अदाकार

बड़े नाज़ुक होते हैं अदाकार

फिल्म स्टार होने का मतलब सिर्फ ऐश्वर्य और प्रशंसकों की चाहत के साए में जीना ही नहीं होता क्योंकि सुर्खियों में रहना अभिनेताओं को बहुत नाज़ुक बना देता है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि बॉलीवुड अदाकार विवेक ओबेरॉय का कहना है।
   
विवेक कहते हैं, स्टार का जीवन सिर्फ फैंसी कारों में चलना और लोगों के बीच मशहूर होना ही नहीं है। लोगों को यह एहसास नही होता कि वो भी नाज़ुक और भावुक होते हैं। वो अपनी ज़िंदगी सुर्खियों में जीते हैं। वह ज़ोर देकर कहते हैं कि यही संवेदनशीलता उन्हें अपनी अगली फिल्म 'प्रिंस' के किरदार से जोड़ती है। इस फिल्म में वह एक स्मार्ट चोर बने हैं जिसकी याददाश्त गुम हो जाती है।

विवेक ने कहा, प्रिंस अपराजेय होता है। वह एक ऐसा आदमी है जो छह लोगों को एक साथ संभाल सकता है लेकिन वह संवदेनशील भी है। उसकी याददाश्त चली गई है और वह अपनी पहचान भूल चुका है।
   
33 साल के विवेक मानते हैं कि स्टार को अपनी प्रसिद्धि की कीमत चुकानी पड़ती है और मीडिया की कड़ी आलोचनाओं को सहना पड़ता है।

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