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समान अवसर आयोग पर गतिरोध खत्म करेंगे पीएम!

समान अवसर आयोग पर गतिरोध खत्म करेंगे पीएम!

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को प्रस्तावित समान अवसर आयोग (ईओसी) पर बने गतिरोध को समाप्त करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ सकता है, क्योंकि संबंधित मंत्रालय इस मुद्दे पर कोई आम राय बनाने में विफल रहे हैं । ईओसी का मकसद एक ही मंच के नीचे सभी वंचित समूहों के लिए सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में मंत्री समूह की दो बैठकें होने के बावजूद ईओसी की राय तथा इसकी स्थिति को लेकर मतभेद अभी भी विभिन्न मंत्रालयों के बीच बने हुए हैं ।

जिस मंत्री समूह को पिछले साल यह मामला सौंपा गया था, उसमें पी चिदंबरम, एके एंटनी, वीरप्पा मोइली, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, ममता बनर्जी, मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खरगे, कुमारी शैलजा, कांतिलाल भूरिया तथा योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया शामिल हैं।

सूत्रों ने बताया जब कांग्रेस में कोई आम राय नहीं बनी तो मामले को मंत्री समूह के पास भेजा गया। अब मंत्री समूह में आम राय नहीं है तो ऐसे में केवल प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप करने से ही कुछ हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि मामले को किसी परिणाम तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री हस्तक्षेप कर सकते हैं।

सच्चर समिति की सिफारिश पर ईओसी का गठन किया गया था, जिसने मुस्लिमों तथा अन्य अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की पड़ताल की। केन्द्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ईओसी गठित करने का वादा किया था।

संप्रग दो के सत्ता संभालने के तुरंत बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने जून 2009 में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए ईओसी गठित करने की सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र किया था। यह पूछे जाने पर कि क्या ईओसी हकीकत बन पाएगा, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा मुझे उम्मीद है कि भिन्न-भिन्न विचार हैं और हम उनका समाधान निकाल रहे हैं।

लेकिन सूत्रों ने बताया कि विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े राष्ट्रीय आयोगों ने ईओसी द्वारा उनकी राय को शामिल किए जाने को लेकर आशंका जताई है। यहां तक कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से जुड़े राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कई बार इस मुद्दे पर अपनी चिंता दोहराई है। पहले भी आयोग ने ईओसी के गठन का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि इसकी कोई जरूरत नहीं है।

इसके अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी अपनी आपत्तियां जाहिर की हैं। खुर्शीद ने इन आशंकाओं को गलत बताया कि ईओसी अन्य आयोगों के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण करेगा। उनका कहना था कि ईओसी का व्यापक दायरा होगा, जबकि आयोग विशेष विशेष लक्षित समूहों के मुद्दों का समाधान करना जारी रखेंगे।

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