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जेंडर बजट की तर्ज पर बाल बजट बनाने की सिफारिश

जेंडर बजट की तर्ज पर बाल बजट बनाने की सिफारिश

महिला आरक्षण विधेयक का भविष्य भले ही अभी अधर में लटका हो, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता वाले महत्वपूर्ण फोरम ने राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों में कुछ सीटें बालिकाओं के लिए आरक्षित किए जाने तथा जेंडर बजट की तर्ज पर बाल बजट बनाए जाने की पुरजोर सिफारिश की है।

संसदीय बाल फोरम ने पिछले दिनों हुई अपनी महत्वपूर्ण बैठक में ये सिफारिशें कीं और अब फोरम की रिपोर्ट को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सौंपकर इन सुझावों को कानून के जरिए अमली जामा पहनाए जाने के लिए केन्द्र सरकार से कहा जाएगा।

बैठक से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बैठक में मौजूद महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ तथा बीजू जनता दल के वरिष्ठ नेता भतुहरि मेहताब ने जेंडर बजटिंग की तर्ज पर बाल शिक्षा और बाल मनोरंजन को बढ़ावा देने, बाल तस्करी को रोकने तथा बालकों के संपूर्ण विकास पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करने के लिए बाल बजट बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया।

बैठक में उनका सुझाव था कि आम बजट की तरह बाल बजट भी अलग से तैयार किया जाना चाहिए। कृष्णा तीरथ ने बैठक में बताया कि बाल तस्करी रोकने के लिए मंत्रालय संबंधित कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करवाने में गृह मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ने बैठक में कहा कि ऐसे समय में जब हम विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की बात कर रहे हैं तो क्यों न स्कूलों में कुछ सीटें बालिकाओं के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि ये कुछ मुद्दे हैं, जिन पर नीति निर्माताओं को संवेदनशील बनाए जाने की जरूरत है।

सूत्रों ने बताया कि बैठक में मौजूद मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि सभी स्कूलों के पास वहां अध्ययनरत बच्चों का एक हेल्थ प्रोफाइल रखने की व्यवस्था की जाए ताकि बच्चों को बेहतर और संतुलित नागरिक के रूप में विकसित करने में मदद की जा सके। सिब्बल ने यह भी सुक्षाव दिया कि बच्चों के विकास को वृहतर परिप्रेक्ष्य में देखे जाने और केवल योजनाएं बनाकर अपने दायित्व की पूर्ति समझने की प्रवृति में सुधार किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने फोरम की आगामी बैठकों में विशेषज्ञों तथा सामाजिक प्रतिनिधियों को भी शामिल किए जाने का सुझाव दिया। फोरम ने इस बात पर चिंता जताई कि स्कूल जाने वाले बच्चों की समस्याएं बदलते समय के अनुसार बढ़ रही हैं और आज बच्चों पर उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने का बहुत अधिक दबाव है। बस्ते के भारी बोझ तथा स्कूल में सृजनात्मक गतिविधियों में कमी ने पठन-पाठन को एक मशीनी गतिविधि बना दिया है, जिसमें उनके खेलने के लिए कोई समय नहीं बचा है।


फोरम के सभी सदस्यों में इस बात पर एक राय थी कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के अनुकूल माहौल मुहैया कराए बिना बच्चों को भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित नहीं किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि बैठक की रिपोर्ट संबंधित मंत्रालय को भेजी जाएगी और उसके बाद सुझावों के अनुसार कानूनों में बदलाव की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा।

स्पीकर की अध्यक्षता में गठित 40 सदस्यीय संसदीय बाल फोरम में सिब्बल तथा कृष्णा तीरथ के अलावा, श्रम एवं रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, मानव विकास संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष आस्कर फर्नांडिस तथा श्रम संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष हेमानंद बिस्वाल भी शामिल हैं।

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