DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ब्रिटेन के कितने सम्राटों के नाम याद हैं आपको

शब्द युद्ध की यह एक अनोखी मिसाल है। छोटे पर्दे के सितमगर कयासों का धुंधलका बिखेर रहे हैं। भारत और पाकिस्तान में पसरे ‘ठाकरे’ आग उगल रहे हैं। मानो सानिया और शोएब की शादी न हुई स्वाभिमान की जंग हो गई। मुझे विवाहबंधन में बंधते इस युगल पर तरस आता है। जिस समय चारों ओर खुशी के अनार फूटने चाहिए थे उस समय नफरत और निजी स्वार्थो का बारूद पसर रहा है। सवाल उठ रहे हैं। शादी होगी भी या नहीं? हो गई तो कितनी लम्बी चलेगी?

जब भी नामचीन लोग करीब आते हैं तो खबर बनती है। कुछ लोगों ने रिश्तों से इतिहास बदल दिया तो कुछ खुद इतिहास बन गए। एडवर्ड आठवें का नाम याद होगा। इंग्लैंड की राजगद्दी पर उनका हक था परन्तु वेलिस सिम्पसन की मुहब्बत के वे ऐसे शिकार हुए कि सत्ता और ऐश्वर्य को लात मार दी। उन्होंने अगर राजपाट हासिल कर लिया होता तो क्या इतिहास उन्हें अजर-अमर-अविनाशी हुक्मरां के तौर पर दर्ज करता? ब्रिटेन के कितने सम्राटों के नाम याद हैं आपको? पर हुकूमत को लात मारकर एडवर्ड जरूर अनश्वर व्यक्तित्वों की श्रेणी में जा खड़े हुए।

इसी तरह जब रूस के तानाशाह स्टालिन की बेटी स्वेतलाना ने कालाकांकर के राजकुमार ब्रजेश सिंह से रिश्तों की पींगें बढ़ाई थीं, तब भूचाल उठ खड़ा हुआ था। भारत और सोवियत संघ की दोस्ती शुरुआती दौर में थी और उसके तन्तुओं को अभी मजबूत होना बाकी था। पर सियासत अपनी जगह, प्यार अपनी जगह। दोनों ने जिंदगी के अंतिम समय तक प्रेम की रीति को निभाया। ब्रजेश सिंह की मृत्यु के बाद स्वेतलाना उनकी अस्थियों को लेकर भारत आई थीं। उन्हें मालूम था कि हम हिन्दुस्तानियों की सबसे बड़ी इच्छा गंगा की गोद में विलीन हो जाना ही होती है। बाद में अप्रैल 1967 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि मैं ब्रजेश सिंह की पत्नी हूँ। 

हालांकि, यह भी सच है कि स्टालिन को मरे तब तक अर्सा हो चला था। उनके जीते जी क्या ऐसा हो पाता?
इसी तरह ब्रिटेन के युवराज चार्ल्स और डायना का रिश्ता कभी सुर्खियों में था। लग रहा था कि युवराज एडवर्ड की परंपरा का निर्वाह करने जा रहे हैं। अपने मुकाबले अकुलीन डायना से शादी कर वे राजपरिवार की सदियों पुरानी मान्यताओं को चुनौती दे रहे थे।

हुक्मरानों को अपनी ओर उठी हुई आंखें बर्दाश्त नहीं होती, चाहे वह अपने बच्चों की ही क्यों न हों लेकिन वह अस्सी के दशक की शुरुआत थी। यूरोपीय समाज तेजी से बदल रहा था। लिहाजा कट्टरपंथी इस शादी को रोक न सके। यह बात अलग है कि संसार का यह सबसे हसीन जोड़ा चैन से रह न सका। इस खूबसूरत परिणय के त्रासद अंत की कहानी हम सबको मालूम है। 

यही वजह है कि भारतीय टेनिस की शहजादी सानिया और पाकिस्तानी क्रिकेट के राजकुमार शोएब मलिक की मंगनी पर किस्म-किस्म की चर्चाएं फिजाओं में तैर रही हैं। प्रतिक्रियाएं उम्मीद के मुताबिक हैं। पाकिस्तान में जीत का जश्न मनाया जा रहा है। वहां के बड़बोलों की कुंठाएं सरसब्ज हो रही हैं। आज भी भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से में लड़के वाले श्रेष्ठतर समझे जाते हैं। सरहद पार ऐसा ही माहौल है।

पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह 21वीं सदी है। चार खौफनाक युद्धों (कारगिल को मिलाकर) और सैकड़ों हिंसक झड़पों के बावजूद भारत-पाकिस्तान का रिश्ता टूटा नहीं है। हम साझा संस्कृति, साझा इतिहास, साझा धरोहर, साझा आकाश, साझी हवा, और साझा जल ग्रहण करते रहे हैं। कुदरत ने हमें एक बनाया था, सियासत ने बांट दिया। सियासतदानों ने ही इतनी जंग कराई पर यह रिश्ता न कमजोर हुआ और न कमजोर होगा। रोटी-बेटी के सम्बन्ध कभी टूटा नहीं करते। हमें मान लेना चाहिए कि हमारी एक बेटी सरहद पार कर रही है, वैसे ही जैसे उस पार की लाखों बेटियों ने इस सरजमीं को अपना घर बना रखा है।

अनुभव बताते हैं कि रिश्ते कभी घृणा पैदा करते हैं तो अक्सर उसे खत्म भी करते हैं। इतिहासकारों का एक वर्ग मानता है कि राजा जयसिंह ने बहन जोधा का विवाह अकबर के साथ कर अपनी प्रजा की रक्षा की थी। उनके इलाके में युद्ध नहीं हुए। यहां के लोग राजस्थान के अन्य हिस्सों के मुकाबले फलते-फूलते रहे। विद्वानों का यह वर्ग इसे राष्ट्रीयताओं का मिलन मानता है। आप उससे सहमत हों या असहमत पर सह सच है कि जयपुर के राजाओं ने एक रिश्ता कर, एक बेटी देकर हजारों बेटियों की रक्षा की थी। क्या अपनी कीमत पर प्रजा का पालन राजा का कर्तव्य नहीं है? यूरोप में भी राजधर्म के पालन की ऐसी कई मिसालें हैं।

ये बातें पुराने दौर की हैं। भारत और पाक लोकतंत्र हैं। जम्हूरियत में प्रजा ही राजा होती है। यह बात अलग है कि इस उपमहाद्वीप में इस अनोखे सिद्धान्त को अभी अमली आकार ग्रहण करना है। कभी फौज तो कभी नेता सीमाओं के दोनों ओर लोकतंत्र का मजाक उड़ाते रहे हैं। इस विकार पर स्थायी रोक सिर्फ नई पीढ़ी लगा सकती है। क्यों न हम यह मान लें कि शोएब और सानिया रिश्तों की नई बुनियाद रखेंगे।

सानिया का कहना है कि वे दुबई में रहेंगी, शोएब पाकिस्तान के लिए खेलते रहेंगे और मैं भारत के लिए। फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि सानिया का टेनिस कैरियर बहुत लम्बा बचा है। लेकिन उनके जज्बे पर भरोसा किया जाना चाहिए और उन अजीब-गरीब सवालों पर खाक डाल देनी चाहिए जहाँ सिर्फ शक और सुबहे हैं। गनीमत है कि सानिया और शोएब खिलाड़ी हैं। अगर मामला कूटनीतिज्ञों, राजनीतिज्ञों या हुक्मरानों का होता तो?

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और कार्ला ब्रूनी का विवाह इस सवाल का जवाब है। ब्रूनी इटली की हैं। फ्रांस और इटली के बीच सदियों से किन्तु-परन्तु के कुछ दौर चलते रहे हैं। तब फ्रांसीसी राष्ट्रीयता के कट्टर समर्थकों ने सवाल उठाया था कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो जाएगा।  राष्ट्रपति सरकोजी अपना कार्यकाल पूरा करने की ओर हैं। अभी तक तो कोई फ्रांसीसी रहस्य कार्ला के जरिए बाहर गया नहीं। उम्मीद है आगे भी नहीं जाएगा। वह प्रेम, प्रेम नहीं है जिसमें मर्यादा नहीं है।

उम्मीद है, सानिया और शोएब इस मर्यादा का पालन करेंगे। उनका अपना अतीत है पर वे अपना भविष्य खुद गढ़ेंगे। कबीर ने कहा है - प्रेम गली अति सांकरी, ता में दुइ न समाएं। दुआ कीजिए वे ऐसे जुड़ें कि कभी अलग न हों।

shashi.shekhar@hindustantimes.com

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ब्रिटेन के कितने सम्राटों के नाम याद हैं आपको