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‘डीटीयू के आंदोलन में शामिल है बाहरी ताकत’

‘डीटीयू में चलाया जा रहा आंदोलन छात्रों का नहीं बल्कि इसमें किसी बाहरी ताकत का हाथ है। नहीं तो डीटीयू बनने के इतने महीने बाद गत् 4 मार्च को छात्र अचानक उग्र आंदोलन कैसे शुरू कर देते।’ डीटीयू (दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी) के कुलपति प्रो. पी. बी. शर्मा में हिन्दुस्तान से बातचीत में ये बातें कहीं। प्रो. शर्मा ने कहा कि ऐसी तमाम गलतफहमियां हैं जिन्हें दूर करने के उद्देश्य से शनिवार को छात्रों के अभिभावकों के साथ एक बैठक बुलाई गई है।

प्रो. शर्मा ने कहा कि हम छात्रों के अभिभावकों को इस विरोध प्रदर्शन की सच्चाई बताना चाहते हैं। हम बताना चाहते हैं कि डीसीई (दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग) को डीटीयू बनाने के क्या-क्या लाभ हैं। हमारी प्रतियोगिता हमेशा ही आईआईटी से रही है फिर क्यों माना जा रहा है कि डीटीयू बनने से इसका महत्व कम हो गया। हम तो कई ऑथोरिटी से मुक्त कर एक ऑथोरिटी के अंदर इस संस्थान को मजबूत बनाना चाहते हैं ताकि हम शिक्षा, शोष और अन्वेषण के क्षेत्र में मील का पत्थर स्थापित कर पाएं।

प्रो. शर्मा ने कहा कि किसी समय का थॉमसन कॉलेज रुड़की विवि बना और बाद में उसे आईआईटी का भी दर्जा मिला। अन्न विवि भी कभी दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से जाना जाता था। दिल्ली सरकार ने वहीं काम किया है जो थॉमसन कॉलेज को रुड़की विवि बनाकर किया गया था। प्रो. शर्मा ने कहा कि हमने कई बार छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया है लेकिन वे बातचीत के मन से नहीं आते। इसलिए उनके अभिभावकों को बुलाना पड़ा है। अब छात्र भी उस बातचीत में शामिल होना चाहते हैं जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है क्योंकि लगभग तीन हजार छात्र, उनके अभिभावक और हमारे शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की एक साथ बैठक कर समस्या के समाधान की उम्मीद संभव नहीं है।

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