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सोलर लैम्प लाएगा ज्ञान का उजियारा

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की लड़कियों की पढ़ाई में बिजली अब रुकावट नहीं बनेगी। हर छात्र के पास अपना सोलर लैम्प होगा। न्याय पंचायत स्तर पर बने मॉडल क्लस्टर विद्यालयों को भी इस तरह के लैम्प दिए जाएँगे। प्रदेश में 51,400 सोलर लैम्प एक लाख से अधिक छात्रओं के जीवन में ज्ञान की रोशनी बिखेरेंगे।

गरीब घरों की जो लड़कियाँ कभी स्कूल नहीं गईं या बीच में पढ़ाई छूट गई उनके लिए प्रदेश भर में 454 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं जहाँ 12-15 घण्टे तक बिजली ही नहीं आती। ऐसे में रात में छात्रएँ पढ़ाई नहीं कर पातीं। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने यूनीसेफ के सहयोग से सोलर लैम्प देने का निर्णय लिया है। इसका पूरा खर्च यूनीसेफ वहन करेगा। इन स्कूलों में छात्राओं की संख्या 45,400 है। हर छात्र को एक-एक सोलर लैम्प दिया जाएगा। यूनीसेफ के शिक्षा विशेषज्ञ बिनोवा गौतम के अनुसार दिन में दो घण्टे में यह लैम्प पूरी तरह चार्ज हो जाएगा और 4-6 घण्टे जलेगा।

इसके अलावा न्याय पंचायत स्तर पर 6000 ऐसे मॉडल क्लस्टर विद्यालय चुने गए हैं जहाँ छात्राओं की संख्या छात्रों से ज्यादा है। इनमें कई ऐसे हैं जहाँ कक्षाओं में दिन में भी अँधेरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर स्कूल को एक-एक लैम्प देने का निर्णय लिया गया है। इससे लगभग 60,000 लड़कियों को लाभ मिलेगा। बिनोवा बताते हैं कि यह लैम्प खरीद लिए गए हैं। इसी माह से वितरण शुरू हो जाएगा।
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ऐसा होगा लैम्प
-40 वाट के बल्ब के बराबर रोशनी होगी
-दो घण्टे धूप में रखने से हो जाएगा चार्ज
-चार से छह घण्टे तक जलेगा
-बाजार में कीमत-1000 रुपए से अधिक
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इनको मिलेंगे लैम्प
-454 कस्तूरबा विद्यालयों की सभी 45,400 छात्राओं को
-6000 मॉडल क्लस्टर स्कूलों को एक-एक। इनमें हैं 60 हजार छात्राएँ।

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