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दिन के हिसाब से बांट लें पूरा पाठ्यक्रम

इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा धीरे-धीरे नजदीक आ रही है। प्रवेश परीक्षा 11 अप्रैल से आईआईटी जेईई के साथ शुरू होगी। जैसे-जैसे समय कम हो रहा है, वैसे-वैसे विद्यार्थियों का तनाव बढ़ रहा है। रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ पुष्पेंद्र यादव का कहना है कि चिंता बढ़ना स्वाभाविक है पर विद्यार्थियों को इससे बचना चाहिए। कम समय में पूरे पाठयक्रम को कवर करना थोड़ी मुश्किल तो है पर नामुमकिन नहीं है। जरूरत है अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर उसे पाने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम करने की। यादव का सुझाव है कि दिनों के हिसाब से पाठ्यक्रम के सभी भागों का निर्धारण कर उसके अनुसार तैयारी करें।

आसान लगने वाले विषय को पहले दोहराएं, कठिन टॉपिक को बाद में लें। आसान टॉपिक तैयार हो जाएंगे तो आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस आत्मविश्वास से कठिन टॉपिक भी सहजता से ग्रहण किया जा सकता है। जो टॉपिक बहुत कठिन लग रहा हो, उसके बारे में यह मूल्यांकन करना उचित होगा कि पूर्व की परीक्षाओं में उससे कितने सवाल आए हैं। पहले उन सवालों को तैयार करें। अगर टॉपिक कठिन हो और महत्वपूर्ण भी न हो तो उसे छोड़ दें क्योंकि इस उलझन में समस्या बढ़ जाएगी। यादव कहते हैं कि हर रोज बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास बेहद जरूरी है। पिछले दस वर्षों में पूछे गए सवालों को साल्व कर स्वमूल्यांकन करें, इससे मनोबल बढ़ेगा और सवाल पूछने का तरीका पता चल जाएगा। कठिनाई से याद होने वाले टॉपिक का चार्ट बनाकर उसे अपनी स्टडी टेबिल के ठीक सामने चस्पा कर दें।

ध्यान रखें
फिजिकल कमेस्ट्री में थियरी को रिवाइज करें। छोटे-छोटे न्यूमेरिकल करे। हर टॉपिक पर कम से कम चार से पांच लंबे सवाल जरूर करें। मोल कंसेप्ट, वैल्यूमेट्रिक एनालसिस, स्टाइक्यूमेट्रीय, यूडोमेट्री को एक साथ पढ़े क्योंकि ये एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। केमिकल इक्यूलिबेरियम, लोनिक इक्यूलिबेरियम, केमिकल कायनेटिक्स को एक साथ पढ़ने के बाद ही इलेक्ट्रो केमेस्ट्री पढ़े। समीकरणों का चार्ट बनाकर उसे रिवाइज करें। ऑरगेनिक कमेस्ट्री में सबसे पहले आईयूपीएसी नेमिंग, कॉमन नेमिंग रिवाइज करें। इसके बाद बांडिंग, सेप्स, बांड एंगल पर ध्यान दें।

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