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नारेबाजी के बाद मिली जॉब फेस्ट की मंजूरी

एक ओर छात्र संगठन प्लसेमेंट नहीं होने को लेकर पीयू प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर एक छात्र संगठन को जॉब फेस्ट के आयोजन की मंजूरी और सहूलियत की खातिर भी प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 2 अप्रैल को 15 कंपनियों को लेकर जॉब फेस्ट की योजना बनाई, लेकिन आयोजन स्थल के तौर पर प्रशासन की ओर से यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम के इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिली। इसके विरोध में वीरवार सुबह एबीवीपी कार्यकर्ता कुलपति कार्यालय के बाहर पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद बैठकों का दौर चला और प्लेसमेंट सेल के संयोजन में इस कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति मिल गई। सबसे अहम बात यह है कि आवेदन पर यूनिवर्सिटी के प्लेसमेंट सेल के सलाहकार की ओर से इस आयोजन को बहुत अच्छा बताया गया है और इसे सुनियोजित ढंग से आयोजित करने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर यूनिवर्सिटी प्रशासन हर काम दबाव में ही करने का आदि क्यों बन गया है। जिस तरीके से प्रदर्शन के बाद एबीवीपी को आयोजन की मंजूरी दी गई, उसे पहले ही बैठकर एक फॉर्मेट में ढालकर क्यों नही आयोजित किया गया।

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