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शासन ने नई किताबों के छपाई पर लगाई रोक

नए सत्र से यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा एक प्रश्नपत्र प्रणाली पर होगी लेकिन छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए दो किताबें ही पढ़नी पड़ेंगी। शासन ने एक प्रश्नपत्र प्रणाली के हिसाब से तैयार हो रहीं किताबों के प्रकाशन पर फिलहाल रोक लगा दिया है। शासन द्वारा बोर्ड मुख्यालय को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि नौवीं और दसवीं कक्षा की किताबें राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल करिकुलम फ्रेम वर्क (एनसीएफ) के तहत तैयार हो रही हैं। जल्द ही इन किताबों को विद्यालयों में पढ़ाने के लिए शीघ्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसलिए नई किताबों के प्रकाशन को रोक दिया जाय।

केन्द्र सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा योजना शुरू की है। इसके तहत पूरे देश में हाईस्कूल और इण्टर कॉलेजों का नवीनीकरण करके के साथ ही इनमें समान कोर्स और किताबों की व्यवस्था की जाएगी। विद्यालयों के नवीनीकरण के लिए धन जारी किया जा रहा है। प्रदेश के 71 जिलों में से सिर्फ मुजफ्फरनगर जिले का डाटा सही मिलने पर वहाँ के विद्यालयों के नवीनीकरण के लिए धन जारी किया जा चुका है, जबकि शेष 70 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से प्रदेश सरकार के माध्यम से फिर प्रस्ताव माँगा गया है।

इसी क्रम में केन्द्र सरकार ने सभी प्रदेश सरकारों को एक समान कोर्स लागू करने का निर्देश दिया है। योजना के तहत केन्द्र सरकार विद्यालयों का नवीनीकरण करने के लिए पर्याप्त धन और किताबें मुहैया करवाएगी। केन्द्र सरकार के इस निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने कक्षा नौ और दस में एक प्रश्नपत्र से छपने वाली किताबों के प्रकाशन पर रोक लगा दी है।

बोर्ड मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान, हिन्दी और अंग्रेजी की किताबें छपने के लिए गई थी। इसी प्रकार राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान, इलाहाबाद में कक्षा नौ के विज्ञान और गणित के एक प्रश्नपत्र की नई किताबें तैयार होनी थी लेकिन वह मामला भी ठण्डे बस्ते में चला गया है।

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