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रमेश के गाउन उतारने पर इसके औचित्य पर छिड़ा विवाद

रमेश के गाउन उतारने पर इसके औचित्य पर छिड़ा विवाद

विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के दीक्षांत समारोहों में पहने जाने वाले पारंपरिक गाउन के खिलाफ मध्यप्रदेश में राजनीतिक दलों से जुडे़ नेताओं की बयानबाजी के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह परंपरा अनुचित है।

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को उस समय सभी स्तब्ध रह गए जब समारोह के मुख्य वक्ता केंद्रीय वन और पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने यह कहते हुए गाउन उतार दिया कि किसी प्राचीन परंपरा को ढोते रहने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि मध्ययुगीन पादरी या पोप की तरह इस तरह की पोशाक धारण करके दीक्षांत समारोह में आना उन्हें पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम भी इस पोशाक के अनुकूल नहीं है।

इससे पूर्व मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसके औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसे पहन कर व्यक्ति नमूना लगता है।

राज्य की स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस भी यह कह चुकी हैं कि दीक्षांत समारोहों में पहना जाने वाला यह गाउन भारतीय परंपरा और रीति रिवाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। बेहतर होगा कि इसके विकल्प की तलाश होनी चाहिए।

इस संबंध में राज्य के एक वरिष्ठ शिक्षाविद का कहना है कि यह सही है कि दीक्षांत समारोहों में पहना जाने वाला गाउन पश्चिमी परंपरा से प्रेरित है। लेकिन इस संबंध में परिवर्तन से जुडी़ कोई भी पहल राष्ट्रीय स्तर पर सर्वानुमति बनाने के बाद ही की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि देश में शिक्षा के स्वरूप और उसकी गुणवत्ता में सुधार करते हुए उसे भारतीय परिस्थितियो के अनुरूप ढाला जाए। दीक्षांत समारोहों में पहने जाने वाले गाउन को लेकर बहस छेड़ने से किसी को कोई फायदा नहीं होगा।

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  • Web Title:रमेश के गाउन उतारते ही इसके औचित्य पर छिड़ा विवाद