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झूठ बोलने के दिन पर बिंदास झूठ बोलिए

झूठ बोलने के दिन पर बिंदास झूठ बोलिए

बचपन में जॉनी जॉनी यस पापा सुनाते हुए हम सबने अपना सिर हिलाकर झूठ बोलने से इंकार किया होगा, लेकिन झूठ तो सभी बोलते हैं कभी घर में तो कभी दफ्तर में, और फिर झूठ बोलने का दिन ही हो तो झूठ से डरना कैसा बिंदास होकर झूठ बोलिए। 4 अप्रेल को हर साल 'टैलिंग लाई डे' मनाया जाता है।
    
हालांकि हमेशा सच बोलने का संस्कार हमारे यहां घुटटी में पिलाया जाता है, लेकिन झूठ को एक कला मानने वालों की भी कमी नहीं है और आज की तनावों से भरी दुनिया में क़दम क़दम पर झूठ का सहारा लेना ही पड़ता है। छुटटी लेनी हो तो बीमारी का झूठ, देर से ऑफिस पहुंचे तो गाड़ी ख़राब होने का झूठ और ऑफिस से जल्दी निकलना हो तो अचानक तबीयत ख़राब होने का झूठ। यह कहना ग़लत नहीं है कि जीवन की छोटी छोटी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए झूठ को बैसाखी की तरह इस्तेमाल करना एक फैशन सा बन गया है।
    
दरअसल, चार अप्रैल ऐसे ही लोगों के लिए है जो झूठ को बैसाखी बना कर अपना काम बनाते हैं। हालांकि इस दिन किसी को भी जी भर कर झूठ बोलने की आज़ादी होती है और कोई झूठ पकड़ा भी गया तो आप कह सकते हैं कि आज टैलिंग लाई डे है। झूठ बोलने का ऐसा अवसर भला रोज़ रोज़ कहां मिलता है, इसलिए साल भर सच्चाई का पहाड़ा पढ़ाने वालों को इस दिन झूठ का शिकार बनाने से हिचकियाएं नहीं।
    
सामाजिक विज्ञान के शोध छात्र शिव बचन का मानना है कि हर बात में झूठ का सहारा लेना और झूठ को सच साबित करना एक प्रकार की फितरत है। वहीं दूसरी ओर झूठ पकड़े जाने पर अपनी बात को संभाल लेना एक अदभुत कला। ज़ाहिर है असल झूठा वही होता है जो झूठ बोलने वाले के चेहरे पर न आने पाए।

कुछ लोगों का मानना है कि झूठ बोलना एक मनोवत्ति है। बिना कारण झूठ बोलना और निर्लज्ज होकर उसे सच साबित करना सबके बस की बात नहीं। लेकिन हमेशा झूठ बोलने को झूठ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अगर किसी एक झूठ से किसी की ज़िंदगी बदल जाती है या किसी नेक काम के लिए झूठ बोला जाए तो वह झूठ, झूठ नहीं होता।
    
सचाई यह है कि आज की दुनिया में बिना झूठ बोले काम भी तो नहीं चलता। कॉल सेंटर में काम करने वाली अनुश्री का मानना है कि झूठ आज की ज़िंदगी में एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। नौकरी बदलनी हो तो बॉस से बीमारी का बहाना बना कर छुटटी ले ली। दोस्तों के साथ देर रात तक मौज मस्ती करनी हो तो अपने घरवालों से झूठ बोल दिया कि आज देर रात तक ऑफिस में काम करना पड़ा। गर्लफ्रेंड के साथ कोई रोमांटिक मूवी देखनी हो तो बोल दिया कि आज कोचिंग क्लास देर तक चलेगी। ऐसे न जाने कितने ही झूठ रोज़ बोले जाते हैं, जिनका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं होता लेकिन इस तरह के झूठ से किसी को कोई बड़ी हानि भी नहीं होती।
   
रोज़ाना की ज़िंदगी में भी झूठ का ख़ूब सहारा लिया जाता है। किसी से नहीं मिलना हो तो कहलवा दिया कि साहब मीटिंग में हैं। किसी का फोन नहीं उठाना है तो दूसरे के हाथ फोन दे दिया और कहलवा दिया कि बिज़ी हैं। तो ऐसे में झूठ अब झूठ कहां रहा, और अगर मामला 'टैलिंग लाइ डे' का हो तो बिंदास होकर बोलें झूठ, क्योंकि यह तो दिन ही झूठों का है।

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