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रबी फसल आने से कम होगी महंगाई: प्रणव

रबी फसल आने से कम होगी महंगाई: प्रणव

महंगाई के लिए आपूर्ति दिक्कतों को जिम्मेदार ठहराते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि रबी फसल मंडियों में आने के बाद अनाज व दालों के दाम नीचे आने की उम्मीद है।

मुखर्जी ने कहा कुछ जिंसों के उपलब्ध न होने के कारण मुद्रास्फीति बढी़ है। इसमें आपूर्ति की अड़चन एक बडी वजह है। उन्होंने कहा हम कदम उठा रहे हैं। रबी फसल के बाद खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होनी चाहिए।

मुखर्जी ने कहा कि देश को 1.8 करोड़ टन दाल की जरूरत है, जबकि उत्पादन सिर्फ 1.4 करोड़ टन होता है। 40 लाख टन की कमी है, इसलिए हमें इसका आयात करना पड़ता है। मुखर्जी ने कहा कि बहुत कम ऐसे देश हैं जो दालों का उत्पादन करते हैं और अंतरराष्ट्रीय कीमतें बहुत उंची हैं।

यही हाल चीनी का है। करीब 90 लाख टन की कमी है। इसी प्रकार देश को करीब 20 लाख टन खाद्य तेल का आयात करना पड़ता है। मुद्रास्फीति फरवरी में 9.89 फीसद पर पहुंच गई जो पिछले 16 महीनों का उच्चतम स्तर था। मुख्य तौर पर आवश्यक खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और बजट में ईंधन पर उत्पाद शुल्क बढ़ाए जाने के कारण महंगाई दर बढ़ी।

20 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान थोकमूल्य आधारित खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 16.35 फीसदी हो गई। मुखर्जी ने कहा कि कई अनाजों की व्यवस्था आवश्यक मात्रा में आयात के जरिए की गई है। उन्होंने चावल पर से आयात शुल्क हटाने का हवाला देते हुए कहा हम आपूर्ति में सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के सरकारी प्रयासों पर मुखर्जी ने आरबीआई द्वारा नकद सुरक्षित अनुपात [सीआरआर] में वद्धि का हवाला दिया। ईंधन की कीमत वापस लेने की संभावना खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि कीमत वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता। मैंने संसद में यह साफ कर दिया है कि यह कोई नया कर नहीं लगाया है।

उन्होंने कहा जब कच्चे तेल की कीमत 127 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी तब इन शुल्कों में कमी थीं। अब जबकि कीमत घटकर 67 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गई तो मुझे रियायतें जारी रखने की कोई वजह नहीं समझ में आतीं।
 वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल पर पांच फीसदी का सीमा शुल्क पहले भी लागू था। बजट में मुखर्जी ने कच्चे तेल पर पांच फीसदी, डीजल और पेट्रोल पर 7. 5 फीसदी और अन्य शोधित उत्पादों पर 10 फीसदी के मूल सीमा शुल्क की व्यवस्था को फिर से लागू किया।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक रुपए के उत्पाद शुल्क के लिए भी यही कहूंगा। यह नया कर नहीं है। इसलिए इसे अब वापस लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता। महिला आरक्षण विधेयक के बारे में मुखर्जी ने सोमवार को इस मुद्दे पर होने वाली महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक से पहले कुछ टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा मैं अभी कुछ नहीं कह सकता। हमें सर्वदलीय बैठक के नतीजे का इंतजार करना चाहिए।

वित्त मंत्री ने पूर्वोत्तर के विकास में विद्रोही गतिविधियों को बडी़ रुकावट बताते हुये कहा कि यहां निजी और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए और जोरशोर से प्रयास किये जाने की जरूरत है। मुखर्जी ने कहा उग्रवाद एवं विद्रोह एक समस्या है। क्षेत्र को इससे छुटकारा दिलाना आसान नहीं है। लेकिन इस समस्या के कारण यहां विकास धीमा है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लिए नई निवेश नीति की घोषणा कुछ समय पहले की गई थी। लोग रुचि दिखा रहे हैं। बुनियादी ढांचे का विकास भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय निवेश आकर्षित करने के लिए काम रहा है, लेकिन और अधिक निजी एवं विदेशी निवेश सुनिश्चित करने के लिए और जोर लगाने की जरूरत है।

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