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नक्सलियों ने स्कूल उड़ाने के लिए मांगी छात्रों से माफी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्यों ने एक पत्र लिखकर विद्यालयों के भवन उड़ाने के लिए छात्रों से माफी मांगी है। नक्सलियों का कहना है कि ऐसा करना उनकी मजबूरी थी।


नक्सलियों की सोन-गंगा-विंध्याचल क्षेत्रीय समिति द्वारा लिखे गए पत्र इन दिनों औरंगाबाद, रोहतास, गया सहित कई जिलों में लोगों और खासतौर से बच्चों में बांटे जा रहे हैं। पत्र के माध्यम से नक्सलियों ने विद्यालय भवनों को उड़ाने के लिए खेद प्रकट किया है। परंतु इस पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि ऐसा करना उनकी मजबूरी थी।

नक्सलियों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम पर भी आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने जंगलों और पहाड़ों को विदेशी कंपनियों के हाथ बेच दिया है।

नक्सलियों ने पत्र के माध्यम से बच्चों को समझाने का प्रयास किया है कि वे ही सच्चे देशभक्त हैं। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि जंगल में रह रहे जनजातीय भाईयों को मारने के लिए जंगल में सैनिकों को भेजा गया है। सरकार की योजना जंगल में स्थापित सारे विद्यालय भवनों को बच्चों से छीनकर सैनिकों को रखने की है।

उल्लेखनीय है कि गत दिसंबर में औरंगाबाद के छात्रों ने नक्सलियों के नाम पत्र लिखकर उनसे विद्यालय भवन नहीं उड़ाने का अनुरोध किया था। गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में बिहार के विभिन्न जिलों में 25 से ज्यादा स्कूली इमारतों को नक्सलियों ने उड़ा दिया या क्षतिग्रस्त कर दिया।

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