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गांव बचाने के लिए गाय बचाना जरूरी


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सीताराम केदियाल ने गोवंश की रक्षा पर जोर देते हुए यह कहा कि देश के किसानों और यहां की सभ्यता की रक्षा के लिए भारतीय गोवंश की रक्षा अनिवार्य है।     

केदियाल ने यह एक भी कहा कि एक साजिश के तहत पश्चिमी देश और संस्थाएं भारतीय गोवंश को समूल नष्ट करने में जुटी हुई है, जिस ओर हमारे समाज का और हम सबका बिल्कुल ध्यान नहीं है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय मूल की गायों और अन्य पशुओं की उपलब्धता समाप्त हो जायेगी।
    
उन्होंने कहा कि गोवंश हमारी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है क्योंकि उस पर ही हमारी कषि, डेरी उद्योग, उर्वरक व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत आवश्यकताएं भी आधारित हैं। लेकिन आज हमारी पश्चिम-उन्मुखता के चलते आज के नौजवान बैलों पर आधारित खेती करने में शर्म महसूस करते हैं। वह प्रदूषण के बाद भी ट्रैक्टर से खेती करना चाहते हैं। इसके अलावा रासायनिक खाद एवं विदेशी बीजों के उपयोग से खेतों की उर्वराशक्ति लगातार घट रही है।
    
विश्व संवाद केंद्र में गौ ग्राम रक्षा विशेषांक का लोकार्पण करते हुए केदियाल ने कहा कि देश में गांव और समाज को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए हमें गाय को हर कीमत पर बचाना होगा। ट्रैक्टर की जगह गाय से जनित बैल से खेती करनी होगी और रसायनिक खाद की जगह गोबर की खाद का प्रयोग करना होगा।

केदियाल ने कहा कि भूसंपदा, जल संपदा, वन संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन करने से ही जीवन की रक्षा होगी और जीवन संपदा का प्रमुख भाग गो संपदा है। इसलिए गौ सेवा करनी चाहिए। गौ आधारित कृषि के स्थान पर रासायनिक खेती से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और भूमि की उर्वरा शक्ति का क्षय हो रहा है। गांवों में शिक्षा-चिकित्सा जैसी जीवन की मौलिक सुविधाओं का अभाव और सिंचाई के लिए जल की कमी के कारण गांवों से पलायन हो रहा है इसलिए सबसे पहले गांवों का विकास करना होगा।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जैव रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं घासीराम केंद्रीय विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रमाशंकर दूबे ने इस संबंध में कहा कि गौ माता के दूध से हमें सम्पूर्ण आहार मिलता है। गोमूत्र में ताम्र एवं स्वर्ण, नैनो पार्टिकिल्स के रूप में होते हैं जो एंटी आक्सीडेंट हैं।

दूबे ने आरोप लगाया कि आज सुनियोजित रूप से भारतीय मान्यताओं को समाप्त करने का षड़यत्र चल रहा है लेकिन हमे इससे जनजागरण के माध्यम से बचना होगा।
   
इस अवसर में स्वामी तेजोमय ने कहा कि पंचगव्य से दैनिक उपयोग के विविध उत्पाद व औषधियों के निर्माण से ग्रामीण जनता की आय में वद्धि की जा सकती है। गो केंद्रित ग्राम विकास से गांवों को समद्धि की ओर ले जाया जा सकता है। इसलिए इस सम्पूर्ण गौ आधारित विज्ञान और प्रौद्यौगिकी पर अनुसंधान करने की आवश्यकता है।

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  • Web Title:गांव बचाने के लिए गाय बचाना जरूरी