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कई राज्यों में वैट दर बढने से आम आदमी पर बढ़ा बोझ

कई राज्यों में वैट दर बढने से आम आदमी पर बढ़ा बोझ

कई राज्यों में मूल्य वर्धित कर (वैट दरें) बढाए जाने से खफा व्यापारी एवं उद्योग जगत ने कहा है कि केन्द्र सरकार के बाद अब राज्य सरकारें भी महंगाई बढाने के लिए आग में घी का काम कर रही है।

गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित कई राज्य सरकारों द्वारा वैट की न्यूनतम दर चार से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिए जाने और कुछ राज्यों द्वारा वैट पर अधिभार लगा दिए जाने से न केवल आम उपभोग की वस्तुओं के दाम बढे हैं, बल्कि उद्योग एवं व्यापार जगत को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

उत्तर एवं मध्य भारत के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर के अतिरिक्त महासचिव सुनील कपूर के अनुसार राज्य अपनी राजस्व स्थिति की मजबूती के लिए सीधे जनता पर बोझ डाल रहे हैं। चार प्रतिशत की वैट दर में ज्यादातर आम उपभोग की वस्तुएं और अर्धनिर्मित उत्पाद अथवा प्रसंस्कृत उत्पाद ही शामिल होते हैं।  इनपर वैट दर बढ़ने से सीधे आम उपभोग की वस्तुओं की महंगाई बढ़ी है।

केन्द्र सरकार के आम बजट में सबसे पहले पेट्रोलियम पदार्थों पर सीमा शुल्क में पांच प्रतिशत वृद्धि की गई और पेट्रोल, डीजल पर एक रूपया प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया। इसके अलावा उत्पाद शुल्क की सामान्य दर आठ से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई।  केन्द्र का बजट आने के बाद कई राज्यों ने अपने बजट में चार प्रतिशत वैट दर को बढ़ाकर पांच प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत की मुख्य दर को 13.5 प्रतिशत कर दिया।

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन ने वैट में वृद्धि के मुद्दे पर बाकायदा आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।  एसोसिशन के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार आगामी 9 और 10 अप्रैल को संगठन कार्यकारिणी की नागपुर में बैठक होगी, जिसमें आगे की रुपरेखा तय की जाएगी।

उन्होंने कहा कि 17 जनवरी 2005 को वैट के बारे में जो श्वेत पत्र जारी किया गया था, उसमें जो भी वादे किए गए थे और नए- नए सपने दिखाए गए थे वह आज सभी चकनाचूर हो गए हैं। उसमें कहा गया था कि कोई भी राज्य कर दरों में बदलाव नहीं करेगी। कर रिफंड प्रक्रिया काफी सरल होगी और सभी को समय पर रिफंड मिलेगा। व्यापार एवं उद्योग जगत में इंस्पेक्टर राज समाप्त होगा। इसके अलावा कहा गया कि देश से बाहर होने वाले निर्यात पर दिया गया कर पूरी तरह से रिफंड किया जाएगा।

खंडेलवाल ने कहा कि वैट के पांच साल बाद आज स्थिति कुछ और ही है।  ईंधन, पूंजीगत सामान और ऐसा तैयार माल जो कि कर मुक्त सामान है इन पर इनपुट कर क्रेडिट पूरी तरह नहीं दिया जा रहा है। गुजरात मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे कई राज्यों ने वैट की दरें बढ़ा दी हैं।

खंडेलवाल ने कहा कि हरियाणा पंजाब ने वैट पर अधिभार थोप दिया, जबकि वैट कानून अधिभार का कोई प्रावधान ही नहीं है।
व्यापारियों की शिकायत है कि वैट प्रणाली की समानता नहीं रह गई है। वैट प्रणाली में औद्योगिक कच्चे माल और प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए चार प्रतिशत, आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं जैसे अनाज आदि के लिए शून्य दर, सोना चांदी और कीमती धातुओं के लिए एक प्रतिशत, मादक पेय, पेट्रोल, डीजल आदि के लिए 20 प्रतिशत की विशेष दर तथा अन्य सभी वस्तुओं पर 12.5 प्रतिशत की सामान्य दर तय की गई थी।

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के वरिष्ठ सलाहकार एसपी सिहं के अनुसार वैट कानून के तहत राज्य वैट दर को निर्धारित दरों से ऊपर तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन उससे कम नहीं कर सकते हैं। सिंह ने भी कहा कि वैट दर बढ़ने से इससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।

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  • Web Title:कई राज्यों में बढ़े वैट दर से बढ़ा बोझ