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दो टूक (03 अप्रैल, 2010)

इसे खेल के कारोबार का साइड इफेक्ट कह सकते हैं। शायद इसीलिए खेल मंत्री एम.एस. गिल से रहा नहीं गया। आईपीएल के ‘माहौल’ पर उन्हें कहना पड़ा कि खेल को खेल रहने दें।

शराब और शबाब के जश्न में खेल की भावनाएं दम तोड़ रही हैं। कारोबार जरूरी है लेकिन हर चीज का कारोबार नहीं होता। कुछ चीजें हमें मनुष्य बनाती हैं। खेल भी उनमें एक है। इसकी मर्यादा का जिम्मा खिलाड़ियों व दर्शकों दोनों पर है।

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  • Web Title:दो टूक (03 अप्रैल, 2010)