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कूटनीति के गंदे हाथ

इधर यह बड़ी चर्चा है कि जार्ज बुश ने क्लिंटन की कमीज से अपने हाथ पोंछ दिए। चुपके से। कहीं अपनी कमीज को उजली दिखाने के लिए तो नहीं? भारत हो या अमेरिका, अपनी कमीज को उजली दिखाने की कोशिश तो हर जगह ही होती होगी। बताते हैं कि अमेरिका बड़ा सभ्य देश है चाहे उसकी कोई सभ्यता न हो।

भारत, चीन, अरब और लातिनी अमरीका की तो सभ्यताएं बड़ी पुरानी हैं, पर अमेरिकी उन्हें सभ्य नहीं मानते। फिर भी एक पूर्व राष्ट्रपति, दूसरे पूर्व राष्ट्रपति की कमीज से हाथ साफ करता है। जेब साफ नहीं करता, हाथ ही साफ करता है। चुपके से। हालांकि जेब भी चुपके से ही साफ की जाती है।

वर्तमान राष्ट्रपति ओबामा साहब ने भी यह बताया था कि जब वे राष्ट्रपति नहीं थे और एक बार वे राष्ट्रपति बुश से मिलने गए थे। तब भी बुश ने उनसे हाथ मिलाने के बाद अपने हाथ साफ किए थे। एक अश्वेत से हाथ मिलाया था, कहीं इसीलिए तो नहीं?

अभी का किस्सा यह है कि हैती में भूकंप आया तो ओबामा साहब ने अपने दोनों पूर्ववर्तियों को मदद के लिए वहां भेजा। हैतीवासियों से मिलने और उनसे हाथ मिलाने के बाद बुश साहब ने क्लिंटन की कमीज पर अपने हाथ पोंछ दिए। चुपके से। उन्होंने अपनी आदत से ही ऐसा किया होगा। क्लिंटन साहब की आदत जरा दूसरी है। गनीमत यही रही कि क्लिंटन ने अपनी आदत के मुताबिक कुछ नहीं किया।

वैसे गरीब हैतीवासियों से हाथ मिलाने के बाद तो बुश साहब ने अपने हाथ क्लिंटन साहब की कमीज से पोंछ लिए। पर इराक और अफगानिस्तान के जिन बेगुनाहों का खून उनकी आस्तीन और उनके हाथ पर लगा है, उसे वे कैसे साफ करेंगे। अभी तक ऐसा कोई सेनेटाइजर नहीं बना जो उसे साफ कर दे। ऐसा होता तो हर हत्यारा पाक-साफ नजर आता। 

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