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अलग दिखने की कवायद

मलयेशिया के साथ एक दिक्कत है। एक ओर तो वह दुनिया के तमाम देशों के साथ मिल कर रहना चाहता है। दूसरी ओर वह अपनी अलग पहचान भी बनाए रखना चाहता है। कुछ मसले ऐसे हैं, जिस पर दुनिया के लगभग सभी देश सहमत हैं। उस मामले में वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर को मान लेते हैं। मलयेशिया उनमें भी कुछ को मानना नहीं चाहता। उन मसलों में बच्चों और औरतों के अधिकार शामिल हैं। अपना देश बच्चों के अधिकार मानना तो चाहता है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सभी अनुच्छेदों को नहीं मान पाता। उसी के चक्कर में अपने यहां शिक्षा का हाल बुरा है। बाल विवाह पर कोई बड़ी पहल नहीं हो पाई है। औरतों के अधिकार के मामले में इंडोनेशिया तक ने हमसे ज्यादा बेहतर काम किया है। औरतों का शोषण न हो उसके लिए वहां कानून है, लेकिन हम झूल रहे हैं। इंडोनेशिया भी इसलामी देश है। लेकिन हम अलग इसलामी देश हैं। 
द स्टार, मलयेशिया

ये चुनौती है बड़ी.. 
अवैध दवाओं का कारोबार दुनिया भर की सरकारों के लिए चुनौती बन गया है। वह एक गजब का संगठित कारोबार है। इन कारोबारियों के हाथ दूर-दूर तक फैले हुए हैं। हर देश में उसका फैलाव है। इसीलिए उससे निपटना सरकारों के लिए बड़ी भारी चुनौती है। सरकारें उनसे निपटने के लिए एक कदम उठाती हैं, वे दो कदम आगे चले जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि करीब पांच करोड़ लोग इन अवैध दवाओं का लगातार इस्तेमाल करने वाले हैं। हमारी सरकार के सामने भी यह चुनौती है। कोई भी सरकार इनसे चलते-फिरते ढंग से नहीं निपट सकती। उसके लिए जबर्दस्त रणनीति बनाने की जरूरत है। हमारी बदकिस्मती है कि जो पैसा विकास काम में लगना चाहिए, उसे इन कारोबारियों को रोकने में लगाना पड़ रहा है।
गयाना क्रॉनिकल

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