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गैर-सार्वजनिक स्थान पर गाली देना भी दंडनीय: अदालत

गैर-सार्वजनिक स्थान पर गाली देना भी दंडनीय: अदालत

बंबई हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी को परेशान करने के लिये अपशब्दों का इस्तेमाल करना तब भी एक अपराध हो सकता है जब ऐसे शब्द सार्वजनिक स्थान पर नहीं कहे गये हों।
   
एक मामले में आरोपी को निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (अश्लील कृत्य या गीत) के तहत दोषी करार दिया था। यह धारा कहती है कि जो कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान पर या उससे निकट किसी को परेशान करने के लिये कोई अश्लील गीत गाता है या अपशब्द कहता है तो उसे तीन महीने तक की सजा दी जायेगी।

मजिस्ट्रेट की अदालत ने वर्ष 1999 में जयचंद पंचम पाटिल (32 वर्ष) को पड़ोसी रत्नमाला को अपशब्द कहने के मामले में दोषी करार दिया था। पाटिल ने अपने परिसर में रहते हुए ही यह कृत्य किया था और रत्नमाला से मारपीट भी की थी। अदालत ने उसे एक महीने कैद की सजा सुनायी। सत्र अदालत ने भी यह फैसला बरकरार रखा।

इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पाटिल के वकील ने दलील दी कि धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर या उससे निकट कहे अपशब्द अपराध हैं और निजी परिसरों में ऐसा होने पर यह अपराध नहीं होगा। बहरहाल, यह अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एबी चौधरी ने पिछले सप्ताह अपने फैसले में कहा कि दंड देने के लिये यह जरूरी नहीं कि अपशब्द सार्वजनिक स्थान पर ही कहे गये हों।

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