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अमर के खिलाफ आपराधिक मामले की जांच करेगा प्रवर्तन निदेशालय!

अमर के खिलाफ आपराधिक मामले की जांच करेगा प्रवर्तन निदेशालय!

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय जरूरत पड़ने पर समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच कर सकता है।

न्यायमूर्ति विनोद प्रसाद और न्यायमूर्ति राजेश चंद्र की खंडपीठ ने कानपुर के निवासी शिवकांत त्रिपाठी की रिट याचिका पर यह व्यवस्था दी। त्रिपाठी ने पिछले वर्ष शहर के बाबूपुरवा थाने में सपा के पूर्व नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

एफआईआर में सिंह पर उत्तरप्रदेश विकास परिषद के चेयरमैन के पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। अमर सिंह ने इन आरोपों से इंकार किया है।

त्रिपाठी इस दलील के साथ अदालत की शरण में गए थे कि प्रवर्तन निदेशालय अमर सिंह के खिलाफ मामले की जांच करे। फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच की जा रही है।

अदालत ने ऐसा कोई निर्देश देने से इंकार कर दिया हालांकि उसने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय को जब भी जरूरत महसूस होगी वह मामले की जांच कर सकता है।

अदालत ने पिछले वर्ष पांच दिसंबर को एफआईआर के सिलसिले में अमर की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए स्पष्ट कर दिया था कि राज्यसभा सदस्य को भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लगाए गए आरोपों पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता हालांकि राज्य सरकार धनशोधन निरोधक कानून के तहत उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के सिलसिले में केन्द्र सरकार के पास जा सकती है, जो सुनवाई के क्रम में उपयुक्त कार्रवाई कर सकती है।

इस बीच अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 10 मई निर्धारित की है और राज्य सरकार से एफआईआर की जांच संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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