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राष्ट्रीय प्रयासों में जुड़ें राज्यः मनमोहन

राष्ट्रीय प्रयासों में जुड़ें राज्यः मनमोहन

देश में अब कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। गुरुवार को छह से चौदह साल के हर बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने संबंधी ऐतिहासिक शिक्षा अधिकार का कानून लागू हो गया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यों से कहा कि इस राष्ट्रीय प्रयास में वे पूरी प्रतिबद्धता से शामिल हों।

नए कानून से करीब एक करोड़ ऐसे बच्चों को सीधा लाभ होगा जो अभी स्कूल नहीं जा रहे हैं। नए कानून के तहत राज्यों के लिए जरूरी हो गया है कि इस आयु के बच्चों का स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करें।

राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी बच्चों की, चाहे उनका लिंग और सामाजिक श्रेणी जो भी हो, शिक्षा तक पहुंच बने। सरकार राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ सुनिश्चित करेगी कि शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने में वित्त पोषण बाधा न बने।

प्रधानमंत्री ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि वह साधारण परिवार में जन्मे थे और स्कूल जाने के लिए उन्हें लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। दिए की रोशनी में पढ़ता था, मैं आज जो भी हूं, शिक्षा की वजह से हूं। शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने वाले संविधान के 86वें संशोधन को संसद ने 2002 में पारित किया था।

बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का कानून भी पिछले साल संसद ने पारित किया, जो शिक्षा के मौलिक अधिकार के कार्यान्वयन को सुगम बनाता है। दोनों ही संविधान संशोधन और नया कानून आज से लागू हो गए। मनमोहन सिंह ने कहा कि 90 साल बाद संविधान को संशोधित किया गया ताकि शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जा सके।

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