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निजी स्कूलों में कोटा, अगले साल

छह से 14 साल के बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून हालांकि गुरुवार से देश भर में लागू हो चुका है, लेकिन निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को 25 फीसदी आरक्षण अब अगले साल मिल पाएगा। वजह यह है कि कानून लागू से पहले ही स्कूलों में पहली कक्षा के लिए प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो गई।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के अनुसार, सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना सिर्फ सरकार की ही नहीं पूरे समाज की जिम्मेदारी है, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि निजी स्कूल इस प्रावधान को लागू कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएंगे।

सिब्बल ने कहा कि 2011 में शुरू होने वाले सत्र से निजी स्कूलों को पहले साल पहली कक्षा में 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों को देनी होंगी। स्कूलों को आठवीं कक्षा तक यह आरक्षण बच्चों को देना होगा। इस प्रकार स्कूलों को 25 फीसदी आरक्षण लागू करने में कुल 8 वर्ष का समय लगेगा।

निजी स्कूलों के संगठन ने इस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। मंत्रालय को उम्मीद है कि अगला सत्र शुरू होने से पहले कोर्ट का फैसला आ जाएगा और वह गरीब बच्चों के हक में होगा। सिब्बल ने कहा कि निजी स्कूलों को धन कमाने के और भी मौके दिए जाएंगे और अंतत: वह गरीब बच्चों को सीटें देने का विरोध नहीं करेंगे। मसलन, उन्हें दो शिफ्टों में स्कूल चलाने का मौका मिलना चाहिए। या वे चाहें तो कौशल विकास संबंधी कोर्स स्कूलों में शुरू करें। अभी स्कूलों और सरकार के पास एक साल का समय बचा है।

यूनिसेफ ने भारत के कदम को सराहा: यूनिसेफ के भारत में प्रतिनिधि करीन हुलशोफ ने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून से न सिर्फ स्कूल से छूटे 80 लाख बच्चों को शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा बल्कि इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे।

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