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अधिकारों में कटौती के बाद रबर स्टांप रह जाएंगे जरदारी

अधिकारों में कटौती के बाद रबर स्टांप रह जाएंगे जरदारी

राष्ट्रपति की असीम शक्तियों में कटौती और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक संवैधानिक सुधार पैकेज को शुक्रवार को पाकिस्तान की संसद में पेश किया गया।

सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने इसे आशाओं का विधेयक कहा है। इस प्रस्ताव का नाम संविधान में 18वां संशोधन विधेयक है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के बाद इस विधेयक पर पांच अप्रैल को सीनेट और नेशनल असेंबली में चर्चा होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि ये संशोधन बिना किसी दिक्कत के पारित हो जायेंगे। पीपीपी ने विपक्ष पीएमएल-एन सहित अपने सहयोगी दलों के साथ कई मुद्दों पर मतभेदों को दूर कर लिया है जिसके बाद संसदीय समिति की सिफारिशों को सभी प्रमुख पार्टियों ने समर्थन किया है। पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के नाम को बदलने और जजों की नियुक्ति जैसे मामलों को लेकर विवाद था।

हालांकि प्रस्तावित सुधारों से संसद को भंग करने की शक्तियां और तीन सेनाओं के प्रमुखों तथा अन्य शीर्ष अधिकारियों को नियुक्त करने के राष्ट्रपति के अधिकार छिन जायेंगे लेकिन जरदारी पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बने रहेंगे, क्योंकि पीपीपी पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत है। प्रधानमंत्री तय करने की राष्ट्रपति की शक्ति बनी रहेगी।

पीपीपी के वरिष्ठ नेता सीनेटर रजा रब्बानी ने समिति की रिपोर्ट को पटल पर रखा। रब्बानी संससदीय समिति के अध्यक्ष थे। रब्बानी ने इस विधेयक को आशाओं का विधेयक कहा जो लोगों की आजादी और संसदीय सर्वोच्चता को सुनिश्चित करेगा।

सांसदों ने मेजे थपथपानी शुरू कर दी। इसी बीच रब्बानी ने कहा कि दिवंगत बेनजीर भुट्टो की स्मृति में यह ऐतिहासिक दिन है। कुछ सांसद तो प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी के पास चले गये और उन्हें हाथ मिलाकर बधाई दी। संविधान के 17वें संशोधन में राष्ट्रपति को सेना प्रमुख और अन्य शीर्ष अधिकारियों को नियुक्त करने की शक्ति प्रदान की गयी थी।

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