DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गड्ढे में तब्दील हो गई है परमहंस की समाधि

राम मन्दिर निर्माण आन्दोलन से प्रमुखता से जुडे़ और दिगम्बर अखाडा़ के महन्त रहे परमहंस रामचन्द्र दास का समाधि स्थल गड्ढे में तब्दील हो गया है।
अयोध्या के सरयू तट पर स्थित इस समाधि पर लगे खंभे और उस पर टिका टिन शेड दो वर्ष पहले ही गायब हो चुके हैं। फर्श भी टूट गया है और समाधि पर भी कुछ नहीं बचा है। परमहंस अयोध्या के विवादित ढांचे से मूर्तियां नहीं हटाए जाने और पूजा अर्चना जारी रखने के लिए 1950 में अदालत में दायर दावे के साथ श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन से सीधे तौर पर जुडे़। वह वर्ष 1950 से सामान्य तरीके से श्रीराम जन्म भूमि के पक्ष में मुकदमा लड़ते रहे लेकिन 1980 के दशक में इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद के जुडने के बाद वह इसके पुरोधा बन गए। साल 1989 में श्रीराम जन्मभूमि न्यास का गठन होने पर परमंहस को इसका अध्यक्ष बनाया गया। तब से जीवनपर्यन्त 31 जुलाई 2003 तक वह न्यास के अध्यक्ष पद पर लगातार रहे।

परमहंस की समाधि स्थल पर पक्का स्मारक तक नही बनवाया जा सका है।जब कि यहां पर भव्य स्मारक बनाए जाने के लिए मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती व सांसद योगी आदित्य नाथ तथा दिगम्बर अखाडा के महन्त सुरेश दास, भारतीय जनता पार्टी के नेता व विश्व हिन्दू परिषद तथा अन्य संगठनों के लोगों ने कई बार घोषणा की हैं लेकिन आज तक यह घोषणा हवाहवाई ही साबित हुई हैं।

दिगम्बर अखाडा़ महन्त सुरेश दास ने संत परमहंस घाट 25 लाख की लागत से स्मारक बनाने की घोषणा दो अगस्त 2006 की थी परन्तु आज तक कुछ नहीं हो सका। परमहंस मंदिर आन्दोलन को विहिप के सहयोग से शिखर तक पहुंचने में मदद की।
वह करीब डेढ दशक तक मन्दिर आन्दोलन को धार देते रहे। परमहंस की गैर मौजूदगी में न केवल मन्दिर आंदोलन धीमा हुआ बल्कि इससे जुडे संत धर्माचार्य सहित कई संगठन भी धीमे पड़ गए।

श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व सांसद डा. राम विलास दास वेदान्ती ने परमहंस की समाधि पर स्मारक न बन पाने पर चिन्ता जताते हुए कहा कि सरयू तट पर परमहंस के नाम से घाट तो नहीं बन सका बल्कि राज्य के पूर्व मंत्री ने अयोध्या के सरयू तट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम से करोड़ो रुपए खर्च करके घाट बनवा दिया गया।
जबकि श्री सिंह एक बार भी अयोध्या नगरी आए ही नही थे। ऐसा प्रतीत होता है परमहंस को भाजपा के वरिष्ठ नेता ,विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ नेता तथा विभिन्न संगठन एक दम भूल गए हैं जबकि उनके अंतिम संस्कार में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपायी, उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ,राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख रहे के.पी.सुदर्शन सहित देश की कई बडी़ बडी़ हस्तियां शामिल हुई थीं।

इस सिलसिले में विश्व हिन्दू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा से जब पूछा गया तो उन्होंने इस सम्बन्ध में बोलने से इन्कार कर दिया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गड्ढे में तब्दील हो गई है परमहंस की समाधि