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महंगाई के रास्ते मोक्ष!

सरकार को लेकर हमारी नाराजगी हमेशा बनी रहती है। महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार तक हर चीज के लिए हम उसे ही जिम्मेदार मानते हैं। हर पार्टी हमें अपनी दुश्मन लगती है। अपनी हर तकलीफ का श्रेय हम उसे देते हैं। मगर ये सब कहते वक्त हम भूल जाते हैं कि सरकार जो कुछ करती है, हमारी बेहतरी के लिए ही करती हैं। हर संभव तरीके से हमारा जीना हराम कर दरअसल वो इस जीवन से ही हमारा मोहभंग करना चाहती है!

नाम न छापने की शर्त पर एक नेता ने कहा भी कि दरअसल हम चाहते हैं कि आम आदमी जीवन की व्यर्थता को समङो। इसलिए अपने स्तर पर हमसे जो बन पड़ता है, हम करते हैं। भले ही वो सब्जियों से लेकर रसोई गैस के दाम बढ़ाने हों या फिर पानी-बिजली की कटौती हो। हमारी कोशिश रहती है कि आम आदमी का वो हाल करें कि उसे अपने पैदा होने पर अफसोस हो और जिस पल उसके अंदर ये भाव जागृत होगा, उसी क्षण उसे मोक्ष का ख्याल आएगा।

जन्म-मरण के झंझट से मुक्ति का, मोक्ष ही उसका एक रास्ता दिखेगा। वो सद्कर्मों की तरफ मुड़ेगा, ईश्वर में उसकी आस्था गहरी होगी। मैंने बीच में टोका, नेताजी आप कैसी बात करते हैं, समाजशास्त्र का नियम है कि समस्याएं बढेंगी तो समाज में अपराध भी बढ़ेगा।

फिर आप कैसे कह सकते हैं कि भूखा और बेरोजगार इंसान ईश्वर की तलाश में घर से निकलेगा। भूखे पेट तो आदमी शर्ट के बटन तक नहीं बंद कर सकता, वो भला मोक्ष की क्या सोचेगा? नेताजी- तो तुम्हें क्या लगता है हम यहीं उसका जीवन स्वर्ग कर, उसे धर्म के रास्ते से हटा दें। मोक्ष की तलाश तो आम आदमी को करनी ही होगी़. यही उसके लिए बेहतर है, और इससे पहले उसे जीवन से मुक्ति कैसे मिले, उसका इंतजाम हम कर देंगे!

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  • Web Title:महंगाई के रास्ते मोक्ष!