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कमाल है! मोदी को भी भगवान याद आ गए

नरेन्द्र मोदी जब से गुजरात दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल के सामने पेश हुए हैं, तब से वे कुछ अजीब सी बातें करने लगे हैं। मसलन, उन्होंने कहा कि वे एसआईटी के बुलाने पर उसके सामने इसलिए पेश हुए हैं, क्योंकि वे कानून का आदर करते हैं। यह भी कहा कि पिछले आठ सालों से मीडिया के कठघरे में खड़ा हूं। उनका यह भी कहना है कि एसआईटी की पूछताछ उनके लिए कठिन क्षण था। उन्होंने भगवान से आत्मबल देने की प्रार्थना भी की है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने गोधरा दंगों का विरोध किया था। 2002 में जब गुजरात जल रहा था, पूरे गुजरात में कानून नाम की चीज खत्म हो गयी थी। सिर्फ नरेन्द्र मोदी का ही कानून चलता था। यदि मोदी कानून का इतना ही सम्मान करने वाले होते तो गुजरात पूरी दुनिया में बदनाम नहीं होता। मीडिया उन्हें कठघरे में भी खड़ा नहीं करता। उन्हें कठिन क्षण में भगवान याद आ गए और भगवान से और अधिक आत्मबल देने की प्रार्थना करने लगे। काश! वे दंगाईयों को काबू करने के लिए भगवान से आत्मबल देने की प्रार्थना कर लेते तो आज उन्हें एसआईटी के सामने पेश नहीं होना पड़ता।
सलीम अख्तर सिद्दीकी, 170,मलियाना, मेरठ

ढोंगी बाबाओं के खिलाफ
डॉ. गौरीशंकर राजहंस जी, आपके लेख पर मेरा मानना है कि तथाकथित ढोंगी बाबाओं से मुक्ति अवश्य मिलेगी लेकिन यह तभी मिलेगी जब स्वयं हमारे भीतर संत, महापुरुष और ढोंगियों को पहचानने की क्षमता हो। हमें यह पता हो कि वास्तविक संत कौन है? यह केवल देश के मीडिया की अकेले की जिम्मेदारी नहीं है। मीडिया ही क्यों मोर्चा संभाले हम क्यों नहीं? कुछ एक महापुरुषों को छोड़कर शेष सभी तंत्र-मंत्र, वास्तु, जाप, ज्योतिष आदि की बातें कर अपनी दुकान चलाते हैं, हम भ्रमित होते हैं क्योंकि हम सांसारिक दुखों से त्रस्त हैं इसीलिए हम इन तथाकथित ढोंगियों के चक्कर में फंस जाते हैं। पर यदि हमें आत्मिक शांति चाहिए तो हमें महापुरुषों के प्रवचनों को ध्यान से सुनना होगा तभी हम जान पाएंगे कि वास्तविक बाबा कौन है।
डॉ. पवन सचदेवा

पैसे के लिए
सीजन थ्री का इंडियन प्रीमियर लीग कई वजहों से क्रिकेट प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है। पहला, उसके 20 ओवरों का उत्साह। दूसरा इन्हीं ओवरों में अधिक से अधिक रनों की झड़ी लगाने वाले दुनिया के बेस्ट खिलाड़ियों का जुनून। तीसरा, मैच में अच्छा प्रदर्शन करने वालें खिलाड़ी को मिलने वाली इनामी राशि। यह धनराशि ही खिलाड़ियों के लिए मछली की आंख के समान है। हो भी क्यो न। क्योंकि ये आईपीएल से पीबीएल यानी पैसा बनाओ लीग, के मकसद से जो शुरू हुआ है। एक उदहारण है राजस्थान रॉयल्स के यूसूफ पठान का। जिन्होने 37 गेंदों पर सैकड़ा जड़ दिया। और अभी भी लोगों के मनोरंजन की उम्मीद बने हुए है। साफ है आईपीएल में मिल रही रकम इस बेहतरीन फार्म का नतीजा है। न केवल उघोगपतियों को बल्कि खिलाड़ियों को भी आईपीएस से बड़ा मुनाफा मिल रहा है।
रेखा सोनी, दिल्ली

कब बदलेंगे ये आदतें
कुछ दिन पहले, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर हुए हादसे में दो लोगों के पैर कट गए। ऐसे ज्यादातर हादसे लोगों कि असावधानी से होते हैं। जल्दबाजी और सबसे पहले जाने कि कोशिश में अक्सर यात्री खुद को मुसीबत में डाल लेते हैं। मेट्रो ट्रेन के अंदर पूरी सूचना देने बावजूद भी ज्यादातर लोग सूचना की अक्सर अनदेखी करते हैं। जिसका परिणाम एक बड़े हादसे कि रूप में होता हैं। इसलिए यात्रियों को हरसंभव सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि कोई बड़ा हादसा ना हो।
बद्री शंकर दास,कटवारिया सराय, नई दिल्ली-16

खाप पंचायतों को सबक
बहुचर्चित मनोज बबली हत्याकांड में पांच हत्यारों को तो मृत्युदंड की सजा मिल चुकी है, पर ऐसे मामले दिल दहला देने वाले हैं। एक ही गोत्र में विवाह के बाद इनको खाप पंचायतों के अड़ियल रवैये का सामना करना पड़ा था। इसका परिणाम दोनों को अपनी जान गवांकर चुकाना पड़ा। मनोज-बबली हत्याकांड में तो बबली के घरवालों ने भी खाप का साथ दिया और शादी के विरोध को अपने सम्मान का सवाल बना लिया। हरियाणा राज्य में इन पंचायतों की मनमानी काफी हद तक अपने पांव पसार चुकी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अदालत के ताजा फैसले से खाप पंचायतों और साथ ही राजनीतिक पार्टियों को सबक मिलेगा।
विजय कुमार, मोहाली 
 
जानवर गोद लेने का चलन
प्राचीन काल से ही गोद लेने की परंपरा देश में रही है। आधुनिक समय में इस परम्परा का विस्तार हुआ है और अब लोग चिड़ियाघर के जानवरों को भी गोद लेने लगे हैं। हाल ही में दिया मिर्जा ने लखनऊ के चिड़ियाघर से चीते के दो शावकों को गोद लिया। अब उनकी देखरेख और भोजन का खर्चा यह अभिनेत्री उठाएगी। यह एक अच्छी परंपरा की शुरुआत है। ऐसी योजनाओं से चिड़ियाघर के रखरखाव के लिए संसाधान जुटाने में मदद मिलेगी।      
राजू पातन, गुरु जम्भेश्वर विवि., हिसार

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