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बद से बदतर बिजली

देश में बिजली के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। लगातार बिजली कटौती होने से लोगों का बुरा हाल है। सरकार उस सिलसिले में कोई ठोस कदम उठा नहीं पा रही है। ऐसा नहीं कि वे कोई कदम नहीं उठा रहे, लेकिन जो भी कर रहे हैं उससे उनकी मजाक जरूर उड़ रही है। शहरी इलाकों में शाम छह बजे से 11 बजे तक एअरकंडीशन नहीं चलाने से कोई दिक्कत हल नहीं होती। बिजली के हालात अगर सुधारने हैं, तो बड़े कदम उठाने होंगे। दिक्कत की जड़ में जाना होगा। यह सही है कि दिक्कत इस सरकार को विरासत में मिली है। लेकिन दिक्कत तो वह है ही। उससे निपटना भी होगा। दिक्कत ज्यादा बिजली खर्च करना नहीं है। असल दिक्कत तो बिजली की कमी होना है। उस ओर सरकार को सोचना होगा।
द डेली स्टार, बांग्लादेश

ये भी कोई चुनाव हैं
संसद के चुनावों का वक्त आ गया है। महज तीन दिन ही चुनावी अभियान के लिए बचे हैं। श्रीलंका में ऐसा चुनाव देखा ही नहीं गया। ऐसा लगता है कि लोगों की उसमें कोई खास रुचि नहीं है। विपक्षी पार्टियों को जिस अंदाज से इस चुनाव को लेना चाहिए था, उन्होंने लिया ही नहीं। सत्ताधारी पार्टी के आगे वे पहले से ही हार मान बैठे हैं। यह चुनाव एक मायने में सबसे शांतिपूर्ण था। दो पार्टियों में अक्सर जो झड़पें होती हैं, वह नजर ही नहीं आईं। फिर ज्यादातर उम्मीदवार अपनी ही छवि बनाने में लगे रहे। पार्टी को उन्होंने पीछे ही रखा। यह कमाल का चुनाव था, जिसमें पार्टी घोषणापत्र पर बहस ही नहीं हुई।
डेली न्यूज, श्रीलंका

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