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ई-बुक

ई बुक की कई परिभाषाएं हैं। दरअसल, ई बुक पूर्व प्रकाशित किताबों का ही इलैक्ट्रॉनिक संस्करण होती हैं। आमतौर पर ई बुक्स को एडोब रीडर की मदद से डाउनलोड किया जा सकता है या इन पुस्तकों को सीडी और डीवीडी रूप में भी प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद उन पुस्तकों को कंप्यूटर स्क्रीन, लैपटॉप आदि पर पढ़ा जा सकता है। कुछ कंप्यूटरों में ई बुक्स को पढ़ने के लिए विशेष प्रोग्राम भी होते हैं। उन प्रोग्रामों में ‘टर्न पेज’ आदि जैसी सुविधाएं होती हैं।

इंटरनेट पर उपलब्ध सभी ई बुक्स शुल्क रहित नहीं होती। कई जरूरी दस्तावेज आदि को मूल्य चुकाने के बाद ही डाउनलोड किया जा सकता है। कई पुस्तकों के साथ भी यही स्थिति होती है। कई पुस्तकें पब्लिक डोमेन पर उपलब्ध होती हैं लेकिन उनका टेकस्ट इस्तेमाल करने के लिए उनके लेखकों से इजाजत लेनी पड़ती है।

कई बार ई बुक्स विशेषत: इंटरनेट के लिए ही लिखी जाती हैं। कई लेखकों के लिए ई बुक्स वित्तीय लाभ की दृष्टि से अधिक कारगर साबित हुई हैं। लेकिन यह चलन अभी विदेशों में है। कई ऐसे ई बुक प्रकाशक हैं जो नवोदित लेखकों की पुस्तकें प्रकाशित करते हैं, लेकिन वह उनके हिस्से के लाभांश का बड़ा हिस्सा भी खुद रखते हैं। इस प्रक्रिया में पुस्तक के विज्ञापन की जिम्मेदारी स्वयं लेखक की होती है।

कई लेखक बिना पैसा लिए भी अपनी पुस्तकों को  डाउनलोड करने की आज्ञा देते हैं। लेकिन इससे पूर्व वह अपनी पुस्तक का कॉपीराइट खुद अपने पास रखते हैं क्योंकि मूल कृति के इंटरनेट से चोरी किए जाने की समस्याएं अभी तक पूरी दुनिया में विकराल रूप धारण किए हुए हैं।

इसलिए ई बुक को ऑनलाइन खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसकी कीमत चुकाई जानी जरूरी होती है। आपको पुराने लेखकों की कृतियां तो मुफ्त मिल सकती हैं, लेकिन नए लेखकों की कृतियां मूल्य चुकाने पर ही प्राप्त होंगी। अभी ई बुक का चलन अपने शुरुआती दौर में है, इसलिए स्क्रीन पर पुस्तक पढ़ने की आदत हरेक को नहीं होती।

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