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पूर्वी-भारत में चक्रवाती तूफान से 7 मरे, 16,000 घर नष्ट

त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और दक्षिणी असम में मानसून से पहले की बारिश में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और करीब 16,000 घर नष्ट हो गए। यहां तेज हवाओं और ओला वृष्टि का कहर जारी है।

अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि रविवार और बुधवार रात बिजली चमकने के साथ आई चक्रवाती आंधी में त्रिपुरा और मिजोरम के तीन-तीन लोग मारे गए जबकि दक्षिणी असम में चाय बागान में काम करने वाली एक महिला की मौत हो गई।

बिजली चमकने के साथ आई मौसमी चक्रवाती आंधी में त्रिपुरा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। बिजली गिरने से एक 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई जबकि सात अन्य घायल हो गए। दक्षिण त्रिपुरा के विभिन्न इलाकों में बांस के घर ढहने से दो महिलाओं की मौत हो गई।

राज्य के राहत विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ''बिजली चमकने, आंधी और तेज हवाएं चलने से पिछले चार दिनों में त्रिपुरा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नौ हजार से अधिक घरों के आंशिक रूप से नष्ट होने के साथ खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, बिजली के खंभे उखड़ गए हैं, टेलीफोन लाइनें खराब हो गई हैं, बड़े पेड़ गिर गए हैं।''

इस चक्रवाती आंधी में पड़ोसी राज्य मिजोरम में 4,000 से ज्यादा घर टूट गए हैं और कम से कम 50 लोग घायल हो गए हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री ललथनहावला ने आइजोल में पत्रकारों से कहा, ''मिजोरम के सभी आठ जिलों में लगभग एक जैसा ही नुकसान हुआ है।''

आइजोल, सरचिप और मामित जिलों में अलग-अलग घटनाओं में घरों और पेड़ों के गिरने से तीन लोग मारे गए हैं।

ललथनहावला ने कहा, ''मैंने मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और उप आयुक्तों से प्रभावित इलाकों का दौरा करने और वहां राहत सामग्री पहुंचाने के लिए कहा है।''

चक्रवाती आंधी में दक्षिणी असम के कछार, करीमगंज और हेलाकांडी जिलों में बांस और फूस से बने 2,000 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है।

मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक दिलीप साहा ने आईएएनएस को बताया कि मानसून की शुरुआत तक चक्रवाती आंधी जारी रहेगी।

 

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