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सरकारी शिक्षा गुणवत्तायुक्त नहीं, इस मिथक को तोड़ेंगे सिब्बल

सरकारी शिक्षा गुणवत्तायुक्त नहीं, इस मिथक को तोड़ेंगे सिब्बल

देश में गुरुवार से लागू हुए शिक्षा का अधिकार कानून को आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि हम इस मिथक को तोड़ना चाहते हैं कि सरकार गुणवत्ता परक शिक्षा प्रदान नहीं कर सकती।
    
सिब्बल ने कहा कि देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू हो चुका है। इसके प्रभाव में आने के बाद अब हमें इस मिथक को तोड़ना है कि सरकार स्कूलों में गुणवत्ता और गुणवत्ता परक शिक्षा नहीं प्रदान कर सकती। कानून में 25 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर निजी गैर वित्तपोषित स्कूलों के विरोध के सवाल पर मंत्री ने कहा, समस्या क्या है। पहली कक्षा में आरक्षण देना है और यह इस साल से नहीं, 2011 से देना है ।

सिब्बल ने यहां कहा कि सरकार के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिन पर ध्यान देना हैं। इन चुनौतियों में उन्होंने देश के स्कूलों में करीब पांच लाख शिक्षकों की कमी, बच्चों का शोषण, देह व्यापार से जुड़ी महिलाओं के बच्चों को स्कूल भेजना, पड़ोस में ही स्कूल होना आदि को गिनाया।

सिब्बल ने इस ओर भी संकेत किया कि कानून लागू होने के बाद इसका क्रियान्वयन एक कठिन कार्य है और इसमें राज्य सरकारों को मदद देनी होगी। सिब्बल ने कानून के प्रभाव में आने के बाद राज्यों से सकारात्मक प्रतिक्रिया आने की बात कही और यह भी कहा कि इस कानून के ठीक से लागू होने के लिए सभी राज्य सरकारों से बातचीत की जाएगी।
   
उन्होंने कहा कि राज्यों के सामने भी चुनौतियां हैं, जिन पर हम ध्यान देंगे। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस कानून के अलावा अन्य योजनाओं के साथ शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता लाने का प्रयास अपने स्तर से करें, केंद्र सरकार उनकी मदद करेगी।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि ऐसी नीतियां ला रहे हैं कि सरकारी संपत्तियों से लाभ हासिल किया जा सके। इसके अलावा सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि शिक्षक पर्याप्त संख्या में हों तो स्कूल में दो पालियां भी चलायी जा सकती हैं। सिब्बल ने कहा कि यह प्रयास समाज के लिए है और हमें समाज के फायदे के लिए सामूहिक प्रयासों के साथ काम करना है। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय ने इस कानून के क्रियान्वयन के लिहाज से अगले पांच साल के लिए 25 हजार करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है।

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