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हिन्दुस्तान कोचिंग ने सहारा दिया, अखबार का शुक्रगुजार हूं

किसान पिता का होनहार पुत्र नितिन आनंद ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इंजीनियर बनने का उसका सपना इतनी आसानी से सफल हो सकता है। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप ने न केवल उसके सपनों को नई राह दिखाई है, बल्कि उसके हौसले को भी बढ़ाया है। अब तो हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप को वह अपना हमसफर मानता है। नितिन के पिताजी कौशल सिंह सीतामढ़ी (बिहार) में किसान हैं और मां गीता देवी शिक्षा मित्र हैं। नितिन बताता है : पापा-मां का सपना मुझे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने का था। बोकारो का नाम शिक्षा के क्षेत्र में शुरू से अव्वल रहा। बहुत नाम सुना था। इसलिए उनके कहने पर बोकारो पढ़ने आया। पापा किसान हैं। ग्रेजुएट हैं। मां भी शिक्षक है। इसलिए पढ़ाई का महत्व दोनों समझते हैं। कठिन आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। नितिन अभी बोकारो के जीजीपीएस में 11वीं कक्षा का छात्र है। उसका मानना है कि सेल्फ स्टडी से ही विद्यार्थी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप मिलने से वह और उसका पूरा परिवार खुश है। अब नितिन का संकल्प है कि वह इंजीनियर बन कर ही रहेगा। कौशल सिंह कहते हैं कि किसान का बेटा इंजीनियर बन जाएगा, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। सीतामढ़ी में पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था नहीं है, लेकिन हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप ने उनके बेटे को सहारा दिया है।

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