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मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारी मेघा

हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप ने इंजीनियर बनने के मेघा के सपने को नई जिंदगी दी है। वह कहती है कि यदि यह स्कॉलरशिप नहीं मिलती, तो उसका सपना कतई पूरा नहीं हो सकता था। मेघा की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है, जिसमें वह ट्यूशन भी ले सकती, कोचिंग तो दूर की बात है। मेघा को-ऑपरेटिव कॉलोनी के गर्ल्स हॉस्टल में रह कर कोचिंग करती है। दुर्भाग्य से मेघा का बोकारो के किसी स्कूल में नामांकन नहीं हो पाया। इसलिए मजबूरी में उसने मुंगेर के एक कॉलेज में 11वीं कक्षा में नामांकन कराया है, लेकिन कोचिंग जरूरी है। इसलिए बोकारो में रहती है। मेघा के पापा जय प्रकाश नारायण गुप्ता मुंगेर में सरकारी नौकरी करते हैं। मम्मी बबीता देवी गृहिणी हैं। पापा-मम्मी अपनी बेटी को आईआईटी से इंजीनियर बनाना चाहते हैं। नामांकन के वक्त मेघा बोकारो आई, लेकिन दुर्भाग्यवश देर होने के कारण उसका नामांकन नहीं हुआ। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। मेघा बताती है कि मुंगेर में उसने हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप का फॉर्म भरा था। भैया सजल ने इसके लिए प्रेरित किया। जब उसका चयन हो गया, तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। मेघा का मानना है कि सेल्फ स्टडी जरूरी है। जितनी मेहनत करेंगे, उतनी सफलता मिलेगी। वह हॉस्टल में रह कर अपनी पढ़ाई कर रही है।

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