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माहौल नहीं था, पर आकाश अमन ने खुद बनाई राह

आकाश अमन की जिद इतनी है कि उसे कोई भी चीज दूर की कौड़ी नहीं लगती। गुरुद्वारा हटिया रोड में रहनेवाले आकाश का माहौल ऐसा नहीं था कि कोई या तो जीनियस बन जाए या फिर ऐसे सपने पाल ले, जिसे पूरे होने में खासी मुश्किलें हों। पर आकाश ने अपनी अलग राह बनायी। आकाश अमन ने हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप की परीक्षा क्लीयर कर अपने कैरियर को एक राह पर ला खड़ा किया है, जहां अब कोई भी कह सकता है कि आकाश का इंजीनियर बनना दूर की कौड़ी नहीं।

अपनी सफलता से बेहद खुश आकाश कहता है- एक अखबार के तौर पर हिन्दुस्तान का हमेशा साथ मिला, पर मेरे कैरियर की राह में भी हिन्दुस्तान हमसफर बन जाएगा, इसकी कल्पना नहीं की थी। वह कहता है- परीक्षा देते वक्त पूरा आत्मविश्वास था। पेपर देकर बाहर आने के बाद लगा पास तो हो जाऊंगा, पर क्या सचमुछ ऐसा होगा कि पुख्ता कोचिंग मिलेगी? पर उसकी सारी आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं, जब उसे बताया गया कि वह सचमुच ब्रिलिएंट जैसे सर्वोत्कृष्ट संस्थान से कोचिंग करेगा और इंजीनियर भी बनेगा।

आकाश इंजीनियरिंग की तैयारी में प्राणप्रण से जुटा है। वह कहता है- टारगेट एचीव करूंगा, तब और ज्यादा खुशी होगी, क्योंकि तब मेरे जीवन का लक्ष्य जो पूरा हो जाएगा। वह कहता है- हिन्दुस्तान ने इतने विद्यार्थियों को प्लेटफार्म दिया, यह भावना ही काबिले तारीफ है।

आकाश के पिता अरुण कुमार सिंह और माता कंचन सिंह ने आकाश की सफलता पर अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा- हिन्दुस्तान ने भविष्य की राह दिखाई है। आकाश जरूर उम्मीदों पर खरा उतरेगा। सरस्वती शिशु मंदिर से मैट्रिक 93.2 फीसदी अंकों से पास करनेवाले आकाश ने अपने मैथ टीचर अरुण पाठक और संस्कृत के शिक्षक विजय मिश्र को अपनी सफलता का श्रेय समर्पित किया है।

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