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मां कहती हैं- गरीब विद्यार्थियों का कैरियर संवर जाएगा

सुमित अनुराग की सफलता उन मेधावियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह समझते हैं कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए संपन्न फैमिली बैकग्राउंड का होना जरूरी है। शुरू से मेधावी और भीड़ से अलग दिखनेवाला सुमित अनुराग बचपन से ही इंजीनियर बनने का सपना देखा करता था। सपने तो सभी देखते हैं, पर सुमित ने होश संभालने पर यह महसूस किया कि उसकी महंगी पढ़ाई का खर्च जुटाना मां-पिता के लिए एक मुश्किल लक्ष्य है।

ऐसी भावनाएं मन में आते ही हौसला टूट जाता है, पर सुमित किसी और धातु का बना हुआ था। उसने तय किया कि पढ़ाई की जिम्मेवारी उसकी है, तो इसमें कोई कोताही वह नहीं करेगा। 10 वीं तक की कक्षाओं में ऐसा कोई साल नहीं रहा, जिसके रिजल्ट ने उसके मां-पिता के माथे पर शिकन पैदा की हो।

जीएंडएच हाई स्कूल, रांची से उसने 10 वीं की परीक्षा दी और 81.4 फीसदी अंक हासिल किए। पिता विपिन कृष्ण रिम्स में साधारण कर्मी हैं। ऐसे परिवारों के साथ अकसर होता यह है कि सपने पूरे करने के लिए जिंदगी का बड़ा हिस्सा तपस्या में ही बीत जाता है। कई बार महत्वाकांक्षाएं उबाल मारती हैं, पर संसाधनों की कमी से मन का उफान सहसा दब जाता है। सुमित के परिवार में एक अच्छी बात यह हुई कि मां-बाप ने सुमित को कभी निराशा के भंवर में फंसने नहीं दिया। वे सुमित के भविष्य को लेकर कोई भी कठिनाई सहर्ष सहने को तैयार थे। उधर सुमित उम्मीदों के साथ मेहनत की जुगलबंदी कर एक नई दिशा की ओर मुखातिब था।

अब सुमित के परिवार के सपने पूरे होने को हैं। सुमित अनुराग ने हिन्दुस्तान की स्कॉलरशिप परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। अब वह ब्रिलिएंट में कोचिंग करेगा और इंजीनियर बनेगा। वह कहता है कि खुशी बयां नहीं की जा सकती। वह जिस लगन से तैयारी कर रहा है, तय है कि वह अपना लक्ष्य पूरा कर के रहेगा। उसे हिन्दुस्तान का साथ मिला, तो मां अंजू सहाय कहती हैं- इस सराहनीय प्रयास से गरीब विद्यार्थियों का कैरियर संवरेगा।

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