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कहा-हिन्दुस्तान ने दी अनलिमिटेड खुशी

हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप की परीक्षा में पास होने के बाद बीरबल की खुशी का ठिकाना नहीं है, उसे मानो मंजिल मिल गई हो। वह दावे के साथ कहता है कि अब उसे मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
किसान दरबारी प्रसाद के बेटे ने स्कूल में दोस्तों की किताबों से पढ़ाई की है। अब तक उसने हर परीक्षा में बेहतर कर यह साबित कर दिया कि ईमानदारी से प्रयास किया जाए, तो गरीबी सफलता में बाधक नहीं बन सकती। बीरबल के बड़े भाई को हर माह 5500 रुपए छात्रवृत्ति मिलती है। साथ ही किताब खरीदने के लिए भी सालाना दस हजार रुपए मिलते हैं। भाई द्वारा भेजे गए पैसे से ही घर चलता है एवं पढ़ाई का खर्चा भी इसी से निकलता है।

बीरबल ने 10वीं की परीक्षा 92.6 फीसदी अंकों से पास की है। इसके बाद उसने इंजीनियरिंग की तैयारी को लेकर काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन हर जगह फीस की राशि देने में उसने खुद को असमर्थ पाया। तब जाकर जैसे ऊपर वाले ने उसकी गुहार सुन ली हो और हिन्दुस्तान की स्कॉलरशिप योजना की घोषणा हुई। इससे बीरबल को उम्मीद की एक किरण दिखाई पड़ी। फार्म भरने के साथ ही उसने ठान लिया कि अगर इंजीनियर बनना है, तो हिन्दुस्तान की परीक्षा पास करनी ही होगी। इसके लिए लगातार दस से 12 घंटे मेहनत करनी शुरू कर दी। और अंतत: परीक्षा में सफलता के साथ ही उम्मीदों को पंख लग गए।

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