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26 फरवरी, 2020|5:41|IST

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परिवार के त्याग को सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाएगा स्वयंविद्

अभावों के बीच पढ़ाई करने वाले स्वयंविद् का चयन हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप में होने से उसके सपनों को पंख लग गए हैं। उसे अपना लक्ष्य अब आसान लगने लगा है। उसके परिवार वाले भी काफी उत्साहित हैं। स्वयंविद् सफलता के चांद-तारों को छू सकेगा, ऐसी अपेक्षा सबकी है। स्वयंविद् में भी आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है। केंद्रीय विद्यालय नंबर-3 का छात्र स्वयंविद् जैनामोड़ निवासी विशद कुमार का पुत्र है। बचपन से ही मेधावी रहे स्वयंविद् को शुरू से ही अपनी पढ़ाई अभावों के बीच करनी पड़ी है। उसकी पढ़ाई के लिए घर की मूलभूत जरूरतों को भी दरकिनार करना पड़ा, या फिर उसमें कटौती करनी पड़ी। उसके पिता ने बताया कि स्वयंविद् ने कभी टय़ूशन या कोचिंग का सहारा नहीं लिया। किंतु स्कूल की फीस और पाठय़ सामग्री के लिए भी कठिनाई उठानी पड़ी। कई बार पैसे उधार भी लेने पड़े। यहां तक कि घर की महिलाओं को गुल्लक में इकट्ठे किये गये पैसों को भी निकालना पड़ा, लेकिन उन्हें और परिवार को इस बात का हमेशा संतोष रहा कि स्वयंविद् पढ़ाई में अव्वल आता रहा।

स्वयंविद् ने बताया कि उसका सपना स्पेस साइंटिस्ट बनना और पिता का सपना अपने पुत्र को आइएएस बनाना है। स्वयंविद् दोनों सपनों को साकार करना चाहता है। स्वयंविद् ने कहा कि परिवार ने जिस कठिन परिस्थितियों में उसे पढ़ाया है, उसे वह व्यर्थ नहीं जाने देगा। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप से उसे बड़ी सहायता मिली है। उत्साह और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

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  • Web Title:परिवार के त्याग को सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाएगा स्वयंविद्