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इरादा है, मजबूत सहारा भी मिल गया है जिज्ञाषु को

केवल बुलंद हौसले से मंजिल नहीं पाई जा सकती। इसके लिए एक मजबूत इरादे और सहारे की भी जरूरत होती है। यह कहना है जिज्ञासु का, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी मुकाम हासिल किया है। उसके लिए हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप एक मजबूत सहारा है। जिज्ञाषु के पिता जैराज बिहार के मधुबनी में सदर अस्पताल में लैब टेक्नीशियन हैं। उनका सपना अपने बेटे जिज्ञाषु को कुशल इंजीनियर बनाने का है। जिज्ञाषु का कहना है कि हिन्दुस्तान ने उनके पिता के सपनों को साकार करने की राह दिखा दी है। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप का फॉर्म भरा और इसमें सफलता भी मिल गई। गृहिणी मां सुमिला देवी का सपना जिज्ञासु को आईआईटी में पढ़ाने का है। 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बोकारो का चयन किया गया, क्योंकि मधुबनी में अच्छे कोचिंग एवं स्कूल नहीं हैं। जिज्ञाषु को सेल्फ स्टडी पर भरोसा है। उसका मानना है कि हर बच्चों को अपने बलबूते पर मेहनत करनी चाहिए, तभी सफलता मिलेगी। जैराज ने बताया कि आर्थिक तंगी तो आती रहती है। सरकारी अस्पताल में नौकरी करता हूं। कभी कभी कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता है, कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाता हूं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की बाधा नहीं पहुंचे। जिज्ञाषु अपने पिता के सपने को पूरा करने के प्रति अब पूरी तरह आश्वस्त है।

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